• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

प्रदेश

From जैनकोष



सिद्धांतकोष से

  1. Space Point, ( जंबूद्वीपपण्णत्तिसंगहो/ प्र. 107) ।
  2. Location, Points or Place as decimal Place. ( धवला 5/ प्र.27) ।

आकाश के छोटे-से-छोटे अविभागी अंशका नाम प्रदेश है, अर्थात् एक परमाणु जितनी जगह घेरता है उसे प्रदेश कहते हैं । जिस प्रकार अखंड भी आकाश में प्रदेशभेद की कल्पना करके अनंत प्रदेश बताये गये हैं, उसी प्रकार सभी द्रव्यों में पृथक्-पृथक् प्रदेशों की गणना का निर्देश किया गया है । उपचार से पुद्गल परमाणु को भी प्रदेश कहते हैं  ।

  1. प्रदेश निर्देश
    1. प्रदेश का लक्षणः -
      1. परमाणु के अर्थ में ।
      2. आकाश का अंश ।
      3. पर्याय के अर्थ में ।
      • स्कंध के भेद प्रभेद - देखें स्कंध - 1.2
      • पृथक्-पृथक् द्रव्यों में प्रदेशों का प्रमाण - देखें वह वह द्रव्य ।
      • द्रव्यों में प्रदेश-कल्पना संबंधी युक्ति - देखें द्रव्य - 4.2
      • लोक के आठ मध्य प्रदेश - देखें लोक - 2.5
      • जीव के चलिताचलित प्रदेश - देखें जीव - 4।
      • प्रदेशबंध - देखें प्रदेशबंध ।

     

     

    1. प्रदेश निर्देश
      1. प्रदेश का लक्षण
        1. परमाणु के अर्थ में
          सर्वार्थसिद्धि/2/38/192/6 प्रदिश्यंत इति प्रदेशाः परमाणवः । = प्रदेश शब्द की व्युत्पत्ति ‘प्रदिश्यंते’ होती है । इसका अर्थ परमाणु है । ( सर्वार्थसिद्धि/5/8/274/7 ) ( राजवार्तिक/2/38/1/147/28 ) ।
        2. आकाश का अंश
          प्रवचनसार/140 आगासमणुणिविट्ठं आगासपदेससण्णया भणिदं । सव्वेसिं च अणूणं सक्कदि तं देदुमवगासं ।140। = एक परमाणु जितने आकाश में रहता है उतने आकाश को ‘आकाश प्रदेश’ के नाम से कहा गया है  और वह समस्त परमाणुओं को अवकाश देने में समर्थ है ।140। ( राजवार्तिक/5/1/8/432/33 ) ( नयचक्र बृहद्/141 )( द्रव्यसंग्रह/27 ) ( गोम्मटसार जीवकांड मू./591/1029) ( नियमसार / तात्पर्यवृत्ति/35-36 ) ।
          कषायपाहुड़/2/2,2/12/7/10 निर्भाग आकाशावयवः (प्रदेश:) = जिसका दूसरा हिस्सा नहीं हो सकता ऐसे आकाश के अवयव को प्रदेश कहते हैं ।
        3. पर्याय के अर्थ में
          पंचास्तिकाय / तत्त्वप्रदीपिका/5 प्रदेशाख्याः परस्परव्यतिरेकित्वात्पर्यायाः उच्यंते । = प्रदेश नाम के उनके जो अवयव हैं वे भी परस्पर व्यतिरेक वाले होने से पर्याय कहलाती हैं ।


    पूर्व पृष्ठ

    अगला पृष्ठ

    पुराणकोष से

    आकाश द्रव्य का सबसे छोटा भाग । हरिवंशपुराण - 7.17


    पूर्व पृष्ठ

    अगला पृष्ठ

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=प्रदेश&oldid=126798"
Categories:
  • प
  • पुराण-कोष
  • करणानुयोग
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 27 November 2023, at 15:15.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki