• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in
Shivir Banner

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

भावपाहुड गाथा 143

From जैनकोष

आगे सम्यग्दर्शन का निरूपण करते हैं, पहिले कहते हैं कि ``सम्यग्दर्शनरहित प्राणी चलता हुआ मृतक है -

जीवविमुक्को सबओ दंसणमुक्को य होइ चलसबओ ।
सबओ लोयअपुज्जो लोउत्तरयम्मि चलसबओ ।।१४३।।

जीवविमुक्त: शव: दर्शनमुक्तश्च भवति चलशव: ।
शव: लोके अपूज्य: लोकोत्तरे चलशव: ।।१४३।।

अरे समकित रहित साधु सचल मुरदा जानियें ।
अपूज्य है ज्यों लोक में शव त्योंहि चलशव मानिये ।।१४३।।

अर्थ - लोक में जीवरहित शरीर को `शव' कहते हैं, `मृतक' या `मुरदा' कहते हैं, वैसे ही सम्यग्दर्शनरहित पुरुष `चलता हुआ मृतक' है । मृतक तो लोक में अपूज्य है, अग्नि से जलाया जाता है या पृथ्वी में गाड़ दिया जाता है और दर्शनरहित चलता हुआ `मुरदा' लोकोत्तर जो मुनिसम्य ग्दृष्टि उनमें अपूज्य है, वे उसको वंदनादि नहीं करते हैं । मुनिभेष धारण करता है तो भी उसे संघ के बाहर रखते हैं अथवा परलोक में निंद्य गति पाकर अपूज्य होता है ।

भावार्थ - सम्यग्दर्शन बिना पुरुष मृतकतुल्य है ।।१४३।।

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=भावपाहुड_गाथा_143&oldid=2850"
Categories:
  • कुन्दकुन्दाचार्य
  • अष्टपाहुड
  • भावपाहुड
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 14 December 2008, at 11:45.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki