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मत्स्यगंधा

From जैनकोष



राजा शांतनु की पुत्री । लोककथा के अनुसार इसका जन्म एक मछली से हुआ था । युद्ध के लिए जाते हुए शांतनु को अपनी पत्नी के ऋतुकाल का स्मरण हो आया । उन्होंने रतिदान हेतु वीर्य ताम्र-कलश में रखकर उस कलश को एक बाज के गले में बांधकर पत्नी के पास भेजा । इस श्येन का एक दूसरे श्येन से युद्ध हुआ । युद्ध करते समय कलश से वीर्य नदी में गिरा जिसे एक मछली निगल गयी । फलस्वरूप वह गर्भवती हुई और उसके गर्भ से एक कन्या उत्पन्न हुई । इसके शरीर से मत्स्य के समान दुर्गंध आने के कारण इसे यह नाम दिया गया युवा होने पर पाराशर ऋषि से यह गर्भवती हुई और इससे व्यास नामक पुत्र हुआ । पाराशर ने इसे योजनगंधा बनाया था । आगे शांतनु ने इससे विवाह किया तथा चित्र और विचित्र नाम के इससे दो पुत्र हुए । पांडवपुराण 2.30-43


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