• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

योगसार - चूलिका-अधिकार गाथा 472

From जैनकोष

आत्मा का महान रोग -

चित्त-भ्रकरस्तीव्रराग-द्वेषादि-वेदन: ।
संसारोsयं महाव्याधिर्नानाजन्मादिविक्रिय: ।।४७२।।

अनादिरात्मनोsमुख्यो भूरिकर्मनिदानक: ।
यथानुभवसिद्धात्मा सर्वप्राणभृतामयम् ।।४७३।।

अन्वय :- चित्तभ्रकर:, तीव्रराग-द्वेषादि वेदन:, नाना-जन्मादि विक्रिय:अयं संसार: (आत्मन:) महाव्याधि: (अस्ति) । अयं (महाव्याधि:) आत्मन: अनादि: अमुख्य:, भूरिकर्मनिदानक:, सर्वप्राणभृतां (च) यथा-अनुभवसिद्धात्मा (अस्ति )।

सरलार्थ :- यह संसार जो चित्त में भ्र उत्पन्न करनेवाला, राग-द्वेषादि की वेदना को लिये हुए तथा जन्म-मरणादिकी विक्रिया से युक्त है, वह आत्मा का महान रोग है । यह महान रोग आत्मा के साथ अनादि-सम्बन्ध को प्राप्त है, अप्रधान है, बहुत कर्मो के बन्ध का कर्ता है और सर्व प्राणियों को ऐसा ही आत्मा अनुभव में आता रहता है, अत: यथा-अनुभवसिद्ध है ।

पिछली गाथा अगली गाथा

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=योगसार_-_चूलिका-अधिकार_गाथा_472&oldid=3661"
Categories:
  • अमितगति आचार्य
  • योगसार : अमितगति आचार्य
  • योगसार - चूलिका-अधिकार : अमितगति आचार्य
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 22 January 2009, at 08:26.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki