• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

योगसार - संवर-अधिकार गाथा 208

From जैनकोष

सम्यग्दर्शनादि पर्यायों का कोई भी कर्ता-हर्ता नहीं -

ज्ञान-दृष्टि-चरित्राणि ह्रियन्ते नाक्षगोचरै: ।
क्रियन्ते न च गुर्वाद्यै: सेव्यमानैरनारतम् ।।२०८।।

उत्पद्यन्ते विनश्यन्ति जीवस्य परिणामिन: ।
तत: स्वयं स दाता न, परतो न कदाचन ।।२०९।।

अन्वय :- ज्ञान-दृष्टि-चारित्राणि अक्षगौचरै: न ह्रियन्ते च अनारतं सेव्यमानै: गुर्वाद्यै: न क्रियन्ते । परिणामिन: जीवस्य (पर्यायत:) तानि उत्पद्यन्ते विनश्यन्ति । तत: स: (जीव:) कदाचन स्वयं दाता न (अस्ति)। (च) न परत: (तानि उत्पद्यन्ते विनश्यन्ति च) ।

सरलार्थ :- स्पर्शनेंद्रियादि इंद्रियों के विषयों को भोगने से सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान एवं सम्यक्चारित्ररूप पर्यायों का हरन अर्थात् नाश नहीं होता । निरन्तर जिनकी सेवा की गई है ऐसे सच्चे गुरु भी अपने शिष्य में सम्यग्दर्शनादि पर्यायों को उत्पन्न नहीं कर सकते । परिणमनशील जीव की ये सम्यग्दर्शनादि पर्यायें स्वयं से उत्पन्न होती हैं और स्वयं विनाश को प्राप्त होती हैं । इसलिए जीव द्रव्य भी इन सम्यग्दर्शनादि पर्यायों का दाता अर्थात् कर्ता-हर्ता नहीं है और न कोई परद्रव्य इन सम्यग्दर्शनादि पर्यायों का उत्पाद तथा व्यय करता है ।

पिछली गाथा अगली गाथा

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=योगसार_-_संवर-अधिकार_गाथा_208&oldid=3423"
Categories:
  • अमितगति आचार्य
  • योगसार : अमितगति आचार्य
  • योगसार - संवर-अधिकार : अमितगति आचार्य
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 21 January 2009, at 06:12.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki