• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

योगसार - संवर-अधिकार गाथा 230

From जैनकोष

मोह का नाश होने पर स्वरूप की उपलब्धि -

निजरूपं पुनर्याति मोहस्य विगमे सति ।
उपाध्यभावतो याति स्फेटक: स्वस्वरूपताम् ।।२३०।।

अन्वय :- (यथा) उपाधि-अभावत: स्फेटक: स्वस्वरूपतां याति (तथा) मोहस्य विगमे सति (जीव:) निजरूपं पुन: याति ।

सरलार्थ :- जिसप्रकार लालपुष्पादिरूप संयोगस्वरूप उपाधि का अभाव हो जाने से स्फेटक अपने शुद्ध स्वरूप को प्राप्त होता है; उसीप्रकार मोह का नाश हो जाने पर जीव पुन: अपने निर्मलस्वरूप को प्राप्त होता है । मोह का नाश होने पर सिद्ध-अवस्था की प्राप्ति होती है - ऐसा कहकर यहाँ निमित्त का ज्ञान कराया है । उपादान की अपेक्षा देखा जाय तो जीव जब स्वयं अपनी योग्यता से स्वाभाविक शुद्ध स्वरूप को प्राप्त होता है, तब मोह का स्वयमेव नाश हो जाता है ।

पिछली गाथा अगली गाथा

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=योगसार_-_संवर-अधिकार_गाथा_230&oldid=3444"
Categories:
  • अमितगति आचार्य
  • योगसार : अमितगति आचार्य
  • योगसार - संवर-अधिकार : अमितगति आचार्य
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 21 January 2009, at 06:16.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki