• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in
Shivir Banner

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

वरवीर

From जैनकोष



सिद्धांतकोष से

महापुराण/सर्ग/श्लोक - ‘पूर्व भव सं. 7 में लोलुप नामक हलवाई था । (8/234) । पूर्व भव सं. 6 में नकुल हुआ । (8/241) । पूर्वभव सं. 5 में उत्तरकुरु में मनुष्य हुआ । (9/90) । पूर्व भव सं. 4 में ऐशानस्वर्ग में मनोरथ नामक देव हुआ । (9/187) । पूर्व भव सं. 3 में प्रभंजन राजा का पुत्र प्रशांत मदन हुआ । (10/152) । पूर्व भव सं. 2 में अच्युत स्वर्ग में देव हुआ । (10/172) । पूर्व वाले भव में अपराजित स्वर्ग में अहमिंद्र हुआ । (11/10)। अथवा सर्वार्थसिद्धि में अहमिंद्र हुआ । (11/160) और वर्तमान भव में वरवीर हुआ । (16/3) । जिसका अपरनाम जयसेन भी था । (47/376) । [युगपत् समस्त भवों के लिए देखें [[ ]](47/376-377)] । यह ॠषभदेव के पुत्र भरत का छोटा भाई था । (16/3) । भरत द्वारा राज्य माँगने पर दीक्षा ले लो । (34/126) । भरत के मुक्ति जाने के पश्चात् मोक्ष सिधारे । (47/399) ।


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

पुराणकोष से

वृषभदेव के पुत्र और भरतेश के छोटे भाई । ये चरम-शरीरी थे । इनका अपर नाम जयसेन था । भरतेश द्वारा राज्य पर अधिकार किये जाने से इन्होंने राज्य त्याग कर अपने पिता से दीक्षा ले ली थी । ये भरतेश के मुक्ति प्राप्त करने के पश्चात् मुक्त हुए । ये सातवें पूर्वभव में लोलुप हलवाई थे । छठे पूर्वभव में नकुल हुए । पांचवें पूर्वभव में उत्तरकुरु में भद्रपरिणामी आर्य हुए । चौथे पूर्वभव में ऐशान स्वर्ग में ऋद्धिधारी देव, तीसरे पूर्वभव में राजा प्रभंजन के प्रशांतमदन नामक पुत्र, दूसरे पूर्वभव में अच्छत स्वर्ग में देय और प्रथम पूर्वभव में अहमिंद्र हुए थे । महापुराण 8.234, 241, 9.90, 187, 10.152, 172, 11. 160, 16. 3-4, 34.126, 47. 376, 399


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=वरवीर&oldid=128519"
Categories:
  • व
  • प्रथमानुयोग
  • पुराण-कोष
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 27 November 2023, at 15:21.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki