• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

 Actions
  • वर्णीजी-प्रवचन
  • Discussion
  • View source
  • View history

वर्णीजी-प्रवचन

वर्णीजी-प्रवचन:चारित्रपाहुड - गाथा 29

From जैनकोष



अमनोज्ञे च मनोज्ञ सजीवद्रव्ये अजीवद्रव्ये च ।

न करोति रागद्वेषौ पंचेंद्रियसंवर: भणित: ।।29।।

इस गाथा में 5 इंद्रिय के निरोध की बात कही गई है । इंद्रिय के विषय 5 है―स्पर्शन इंद्रिय का विषय स्पर्श, रसनाइंद्रिय का विषय रस, घ्राणेंद्रिय का विषय गंध, चक्षुइंद्रिय का विषय रूप और कर्णइंद्रिय का विषय शब्द है । ये पांचों विषय यदि मनोज्ञ हैं, आकर्षक हैं तो भी उनमें प्रीति भाव न लाना, बेहोश न होना, उन्ही को सब कुछ न समझना । और यदि वे सभी विषय अमनोज्ञ हैं अरुचिकर हैं, खोटे हैं, दुःख दे सकने वाले हैं तो उसमें भी अरति न करना, द्वेष और ईर्ष्या न करना, यह है 5 इंद्रिय के सम्वरण का उपाय । यदि इष्ट विषय में भी प्रीति गई तो वह इंद्रिय से संबंध भी स्वच्छंद है और उसकी धारा ऐसी बनती है कि इंद्रिय को स्वच्छंदता बढ़ती चली जाती है । तो इन विषयों में रागद्वेष न करना सो पंचेंद्रिय संवरण कहलाता है ।


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

अनुक्रमणिका

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=वर्णीजी-प्रवचन:चारित्रपाहुड_-_गाथा_29&oldid=81484"
Categories:
  • चारित्रपाहुड
  • प्रवचन
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 17 May 2021, at 11:55.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki