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वर्णीजी-प्रवचन

वर्णीजी-प्रवचन:ज्ञानार्णव - श्लोक 1303

From जैनकोष



पर्यंकंमर्द्धपर्यंकं वज्रं वीरासनं तथा।

सुखारविंदपूर्वे च कायोत्सर्गश्च सम्मत:।।1303।।

ध्यान करने के संबंध में कितने आसन का विधान है, उसका इस श्लोक में वर्णन है। पर्यंक आसन जिसका दूसरा नाम पद्मासन है। बायें पैर को दाहिने पैर पर रखना, फिर दाहिने पैर को बायें पर रखना और पीठ छाती बिल्कुल सीधी करके बैठना यह है पर्यंक आसन। आसन में भी कुछ प्रभाव है। जैसे सामायिक करने के लिए पद्मासन लगाकर बिल्कुल सीधे बैठ जाय तो इस आसन के कारण भी थोड़ा बहुत चित्त पर प्रभाव होता है, कुछ बाहरी विकल्प कम होते है और साथ ही यदि मोटे स्वर से धीमी हल्की आवाज से ॐ शब्द का देर तक उच्चारण करे तो उसका भी प्रभाव होता है। उस समय ऐसी स्थिति सही बनती है कि सब जगह से बाहर से हटकर हम अपने में प्रवेश करने का कार्य कर रहे हैं। तो आसन में भी प्रभाव हुआ करता है। दूसरा आसन है अर्द्ध पर्यंक की बात। दाहिने पैर को बायें पैर पर रखना, यही है अर्द्ध पर्यंक। एक पैर ही रखा गया, बायां पैर नीचे ही रहा, इस अर्द्ध पर्यंक आसन में कई जगह मूर्तियाँ पायी जाती हैं। दक्षिण में जैनबद्री की तरफ ऐसी कुछ मूर्तियाँ हैं जो अर्द्ध पर्यंक आसन में पायी जाती हैं। तो अर्द्ध पर्यंक भी एक आसन होता है जिसमें ध्यान की सिद्धि की जाती है। तीसरा है वज्रासन। दोनों पैरों पर बैठना यह है वज्रासन। चौथा बताया है वीरासन। बायें पैर पर तो वज्रासन की तरह बैठना और दाहिने पैर पर खड़े रहना जैसे वीर पुरुष बैठते हैं और जब चौकन्ना होने के लिए बैठते हैं तो इस तरह बैठते हैं। इसके बाद बताया है सुखासन। जैसे आप सब लोग सुखपूर्वक बैठते हैं वह सुखासन है। आप लोग दोनों पैर नीचे किए हुए हैं और पर्यंक के आसन जैसी मुद्रा में आप बैठे हुए हैं तो यह हुआ सुखासन। और कायोत्सर्ग भी एक आसन है। एकदम खड़े हो गए और हाथ को ढीला करके छोड़ दिया वह है कायोत्सर्ग आसन। तो इस आसन में ध्यान की विशेषता लाने का कुछ प्रभाव है। कायोत्सर्ग में खड़े होकर भी देख लीजिए, हाथ को ढीला करके अथवा हाथ को कड़ा करके कोई खड़ा रहे कई दिन तो ध्यान जैसी बात नहीं आती है और कोई सोचते होंगे कि बहुत देर तक खड़े रहने में ध्यान यदि जम जाय किसी एक ओर और शरीर की दृष्टि न रखे तो कहीं गिर न जाये। तो ध्यान से नहीं गिरता, मगर नींद आ जाय तो गिर जाय, पर कायोत्सर्ग से ध्यान करे तो ध्यान में नहीं गिरता। यों अनेक बातें आसन के योग्य बतायी गई हैं।


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