• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

 Actions
  • वर्णीजी-प्रवचन
  • Discussion
  • View source
  • View history

वर्णीजी-प्रवचन

वर्णीजी-प्रवचन:ज्ञानार्णव - श्लोक 474

From जैनकोष



सत्याद्युतरनि:शेषयमजातनिबंधम्​ ।शीलैश्चर्याद्यधिष्ठानमहिंसाख्यं महाव्रतम्​ ॥474॥

सर्वोत्कृष्ट व्रत अहिंसा ― मुख्य व्रत तो अहिंसा है, इसके बाद सत्य, अचौर्य आदिक 4 महाव्रत और हैं । अहिंसा के मायने है, चित्त में विकार न उत्पन्न हो जाना । जीवघात न करना यह तो द्रव्य अहिंसा है, जीव घात न करके भी वह अहिंसक है यह नियम नहीं है । अहिंसक तो वास्तविक मायने में तब है जब हम अपने चित्त में विकारभाव नहीं लाते हैं, तो विकार न आने देना ऐसी अहिंसा हो वही तो सत्य, अचौर्य, ब्रह्मचर्य और निष्परिग्रहता का पालन कर सकता है, अतएव अहिंसा महाव्रत 4 महाव्रतों का कारण है । दूसरी दृष्टि से देखिये तो सब कुछ अहिंसा के पालन के लिए किया जाता है, सत्य भी अहिंसा का साधक, अचौर्य, ब्रह्मचर्य, निष्परिग्रहता आदिक भी अहिंसा के साधक हैं । तो चार महाव्रतों का कारण अहिंसा है और जितने भी अतिरिक्त गुण पालन किए जायें, बहुत ऊँची- ऊँची चर्चायें, तपश्चरण, अनशन आदिक विधान किये जायें उनका स्थान भी अहिंसा है अर्थात्​ समस्त उत्तरगुण भी इस अहिंसा महाव्रत के आधीन हैं । अहिंसा व्रत में मुख्यता अपने में विकार न आने देने की है । निर्विकार हृदय होगा तो सब आचरण सही होंगे और अंतर में विकार होंगे तो आचरण सही नहीं हो सकता ।


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

अनुक्रमणिका

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=वर्णीजी-प्रवचन:ज्ञानार्णव_-_श्लोक_474&oldid=84168"
Categories:
  • ज्ञानार्णव
  • प्रवचन
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 2 July 2021, at 16:34.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki