• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

 Actions
  • वर्णीजी-प्रवचन
  • Discussion
  • View source
  • View history

वर्णीजी-प्रवचन

वर्णीजी-प्रवचन:समयसार - गाथा 337

From जैनकोष



तम्हा ण को वि जीवो अबंभचारी दु अम्ह उवदेसे।जम्हा कम्मं चेव हि कम्मं अहिलसदि इदि भणदं।।337।।

जीव के अपरिणयितृत्व पर आपत्ति―जब कर्म भी अभिलाषा करता तब हमारे सिद्धांत में कोई जीव अब्रह्मचारी नहीं है ऐसा शंकाकार जीव को एकांतत: अपरिणामी सिद्ध कर रहा है। जीव स्वरूप निश्चल है। ऐसा निश्चल है कि उसमें कोई तरंग नहीं उठती। सारा नृत्य यह प्रकृति का हो रहा है पर जैन सिद्धांत तो प्रत्येक सत को परिणमता हुआ मानता है यदि आत्मा विभाव परिणाम नहीं करता, शुभ अशुभ परिणाम नहीं करता, प्रकृति ही सब कुछ करती तो आत्मा ने क्या किया ? कुछ नहीं किया। यदि आत्मा ने कुछ नहीं किया तो अपरिणामी हुआ और जो अपरिणामी हैं वे सब असत् हैं। कर्म के उदय से अभिलाषा तो होती है पर जीव में अभिलाषा होती है, कर्म ही अभिलाषा नहीं करते, कर्म जड़ हैं, ऐसे चिदाभास की परिणति कर्म में नहीं होती। लो यहां कुछ नहीं किया जाता इस पर आपत्ति आ रही है और घर में भी कुछ न करने पर लड़ाई होती है, हम ज्यादा काम करती हैं, यह बैठी रहती हैं ऐसी लड़ाईयाँ होती हैं। यहां यह बता रहे है कि यदि कुछ काम न करे तो पदार्थ का विनाश हो जाय आगे यह सांख्यानुयायी कह रहा है।


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

अनुक्रमणिका

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=वर्णीजी-प्रवचन:समयसार_-_गाथा_337&oldid=88443"
Categories:
  • समयसार
  • प्रवचन
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 20 September 2021, at 12:32.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki