सामान्य परिचय
| तीर्थंकर क्रमांक |
3 |
| चिह्न |
अश्व |
| पिता |
दृढराज्य |
| माता |
सुषैणा |
| वंश |
इक्ष्वाकु |
| उत्सेध (ऊँचाई) |
400 धनुष |
| वर्ण |
स्वर्ण |
| आयु |
60 लाख पूर्व |
पूर्व भव सम्बंधित तथ्य
| पूर्व मनुष्य भव |
विमलवाहन |
| पूर्व मनुष्य भव में क्या थे |
मण्डलेश्वर |
| पूर्व मनुष्य भव के पिता |
रिपुंदम |
| पूर्व मनुष्य भव का देश, नगर |
” ” क्षेमपुरी |
| पूर्व भव की देव पर्याय |
अ.ग्रैवेयक |
गर्भ-जन्म कल्याणक सम्बंधित तथ्य
| गर्भ-तिथि |
फाल्गुन शुक्ल 8 |
| गर्भ-नक्षत्र |
मृगशिरा |
| गर्भ-काल |
प्रात: |
| जन्म तिथि |
कार्तिक शुक्ल 15 |
| जन्म नगरी |
श्रावस्ती |
| जन्म नक्षत्र |
ज्येष्ठा |
| योग |
साम्ययोग |
| वैराग्य कारण |
मेघ |
| दीक्षा नक्षत्र |
ज्येष्ठा |
| दीक्षा काल |
अपराह्न |
| दीक्षोपवास |
तृतीय उप. |
| दीक्षा वन |
सहेतुक |
| दीक्षा वृक्ष |
शाल |
| सह दीक्षित |
1000 |
ज्ञान कल्याणक सम्बंधित तथ्य
| केवलज्ञान तिथि |
कार्तिक कृष्ण 5 |
| केवलज्ञान नक्षत्र |
ज्येष्ठा |
| केवलोत्पत्ति काल |
अपराह्न |
| केवल स्थान |
श्रावस्ती |
| केवल वन |
सहेतुक |
| केवल वृक्ष |
शाल |
निर्वाण कल्याणक सम्बंधित तथ्य
| योग निवृत्ति काल |
1 मास पूर्व |
| निर्वाण तिथि |
चैत्र शुक्ल 6 |
| निर्वाण नक्षत्र |
ज्येष्ठा |
| निर्वाण काल |
अपराह्न |
| निर्वाण क्षेत्र |
सम्मेद |
समवशरण सम्बंधित तथ्य
| समवसरण का विस्तार |
11 योजन |
| सह मुक्त |
1000 |
| पूर्वधारी |
2150 |
| शिक्षक |
129300 |
| अवधिज्ञानी |
9600 |
| केवली |
15000 |
| विक्रियाधारी |
19800 |
| मन:पर्ययज्ञानी |
12150 |
| वादी |
12000 |
| सर्व ऋषि संख्या |
200000 |
| गणधर संख्या |
105 |
| मुख्य गणधर |
चारुदत्त |
| आर्यिका संख्या |
330000 |
| मुख्य आर्यिका |
धर्मश्री |
| श्रावक संख्या |
300000 |
| मुख्य श्रोता |
सत्यवीर्य |
| श्राविका संख्या |
500000 |
| यक्ष |
त्रिमुख |
| यक्षिणी |
प्रज्ञप्ति |
आयु विभाग
| आयु |
60 लाख पूर्व |
| कुमारकाल |
15 लाख पूर्व |
| विशेषता |
मण्डलीक |
| राज्यकाल |
44 लाख पूर्व+4 पूर्वांग |
| छद्मस्थ काल |
14 वर्ष |
| केवलिकाल |
1 लाख पू.–(4 पूर्वांग 14 वर्ष) |
तीर्थ संबंधी तथ्य
| जन्मान्तरालकाल |
30 लाख करोड़ सागर +12 लाख पू. |
| केवलोत्पत्ति अन्तराल |
10 लाख करोड़ सागर +4 पूर्वांग 4 वर्ष |
| निर्वाण अन्तराल |
10 लाख करोड़ सागर |
| तीर्थकाल |
10 लाख करोड़ सागर +4 पूर्वांग |
| तीर्थ व्युच्छित्ति |
❌ |
| शासन काल में हुए अन्य शलाका पुरुष |
| चक्रवर्ती |
❌ |
| बलदेव |
❌ |
| नारायण |
❌ |
| प्रतिनारायण |
❌ |
| रुद्र |
❌ |
महापुराण/49/ श्लोक सं.पूर्वभव सं.2 में कच्छ देश के क्षेमंकरपुर का राजा विमलवाहन था (2)। पूर्वभव में ग्रैवेयक के सुदर्शन विमान में अहमिंद्र, (9)। वर्तमानभव में तीसरे तीर्थंकर थे (19)। विशेष परिचय - देखें तीर्थंकर - 5।
पूर्व पृष्ठ
अगला पृष्ठ