• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

संयत

From जैनकोष



सिद्धांतकोष से

बहिरंग और अंतरंग आस्रवों से विरत होने वाला महाव्रती श्रमण संयत कहलाता है। शुभोपयोगयुक्त होने पर वह प्रमत्त और आत्मसंवित्ति में रत होने पर अप्रमत्त कहलाता है। प्रमत्त संयत यद्यपि संज्वलन के तीव्रोदयवश धर्मोपदेश आदि कुछ शुभक्रिया करने में अपना समय गँवाता है, पर इससे उसका संयतपना घाता नहीं जाता, क्योंकि वह अपनी भूमिकानुसार ही वे क्रियाएँ करता है, उसको उल्लंघन करके नहीं।

  1. संयत सामान्य निर्देश
    1. संयत सामान्य का लक्षण।
    2. प्रमत्त संयत का लक्षण।
    3. अप्रमत्तसंयत सामान्य का लक्षण।
    • अप्रमत्तसंयत गुणस्थान के चार आवश्यक। - देखें करण - 4।
    • एकांतानुवृद्धि आदि संयत। - देखें लब्धि - 5।
    • प्रमत्त व अप्रमत्त दो गुणस्थानों के परिणाम अध:प्रवृत्तिकरणरूप होते हैं। - देखें करण - 4।
    • संयतों में यथा संभव भावों का अस्तित्व। - देखें भाव - 2।
    • संयतों में आत्मानुभव संबंधी। - देखें अनुभव - 5।
    1. स्वस्थान व सातिशय अप्रमत्त निर्देश।
      * सर्व गुणस्थानों में प्रमत्त अप्रमत्त विभाग। - देखें गुणस्थान - 1.4।
    1. दोनों (6-7) गुणस्थानों का आरोहण व अवरोहण क्रम।
    • चारित्रमोह का उपशम, क्षय, व क्षयोपशम विधान। - देखें वह वह नाम ।
    • सर्व लघुकाल में संयम धारने की योग्यता संबंधी। - देखें संयम - 2।
    • पुन: पुन: संयतपने की प्राप्ति की सीमा। - देखें संयम - 2।
    1. संयत गुणस्थान का स्वामित्व।
    • मरकर देव ही होते हैं। - देखें जन्म - 5,6।
    • भोगभूमि में संयम न होने का कारण। - देखें भूमि - 9।
    • प्रत्येक मार्गणा में गुणस्थानों के स्वामित्व संबंधी शंका समाधान। - देखें वह वह नाम ।
    • दोनों गुणस्थानों में संभव जीवसमास मार्गणास्थान आदि 20 प्ररूपणाएँ। - देखें सत् ।
    • दोनों गुणस्थानों संबंधी सत्, संख्या, क्षेत्र, स्पर्शन, काल, अंतर, भाव व अल्पबहुत्वरूप आठ प्ररूपणाएँ। - देखें वह वह नाम ।
    • सभी गुणस्थानों में आय के अनुसार व्यय होने का नियम। - देखें मार्गणा ।
    • दोनों गुणस्थानों में कर्म प्रकृतियों का बंध, उदय, सत्त्व। - देखें वह वह नाम ।
  2. संयत निर्देश संबंधी शंकाएँ
    1. प्रमत्त होते हुए भी संयत कैसे।
    • सामायिक स्थित भी गृहस्थ संयत नहीं। - देखें सामायिक - 3।
    • व्रती भी मिथ्यादृष्टि संयत नहीं है। - देखें चारित्र - 3.8।
    1. अप्रमत्त से पृथक् अपूर्वकरण आदि गुणस्थान क्या हैं।
    2. संयतों में क्षायोपशमिक भाव कैसे।
    3. संज्वलन के उदय के कारण औदयिक क्यों नहीं।
    • इन्हें उदयोपशमिक क्यों नहीं कहते। - देखें क्षयोपशम - 2.3।
    1. सम्यक्त्व की अपेक्षा तीनों भाव हैं।
    2. फिर सम्यक्त्व की अपेक्षा इन्हें औपशमिकादि क्यों नहीं कहते।
    3. सामायिक व छेदोपस्थापना संयत में तीनों भाव कैसे।
  3. प्रमादजनक दोष परिचय
    1. आर्तध्यान व स्खलना होती है पर निरर्गल नहीं।
    2. साधु योग्य शुभ कार्यों की सीमा।
      * शुभोपयोगी साधु भव्यजनों को तार देते हैं। - देखें धर्म - 5.2।
    1. परंतु फिर भी संयतपना घाता नहीं जाता।


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ


पुराणकोष से

(1) एक महामुनि । बाली के पूर्वभव के जीव सुप्रभ ने इन्हीं मुनि से संयम लिया था । पद्मपुराण - 106.185,पद्मपुराण - 106.192-197

(2) व्रती जीव । संसारी जीव असंयत, संयतासंयत और संयत तीन प्रकार के होते हैं । इनमें संयत जीव छठे गुणस्थान से चौदहवें गुणस्थान तक नौ गुणस्थानों में पाये जाते हैं । हरिवंशपुराण - 3.78


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=संयत&oldid=132045"
Categories:
  • स
  • पुराण-कोष
  • करणानुयोग
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 22 February 2024, at 10:21.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki