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समुद्रदत्त

From जैनकोष



(1) अयोध्या का एक सेठ । यह पूर्णभद्र और मणिभद्र का पिता था । हरिवंशपुराण - 43.148-149 देखें समुद्र - 3

(2) एक मुनि । ये आराधनाओं की आराधना कर छठे ग्रैवेयक के सुविशाल नामक विमान में अहमिंद्र हुए थे । हरिवंशपुराण - 18.105, 108

(3) जंबूद्वीप के पूर्वविदेह क्षेत्र में पुष्कलावती देश की पुंडरीकिणी नगरी का एक सेठ । यह इस नगर के राज सेठ कुबेरमित्र की स्त्री धनवती का भाई था । कुबेरमित्र ने एक बहिन कुबेरमित्रा इसे विवाही थी । इसके प्रियदत्ता आदि बत्तीस कन्याएं थीं । महापुराण 46.19-20, 41-42

(4) पुंडरीकिणी नगरी के सेठ सागरसेन का दूसरा पुत्र । यह सागरदत्त का छोटा भाई था । इसकी बहिन सागरदत्ता थी जो सेठ वैश्रयणदत्त को विवाही गयी थी और इसका विवाह सर्वदयिता के साथ हुआ था । महापुराण 47.195-198


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