• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

सुंदरी

From जैनकोष



सिद्धांतकोष से

भगवान् ऋषभदेव की पुत्री थी। विरक्त होकर कुवांरी ने दीक्षा ग्रहण की। ( हरिवंशपुराण/12/42 )।


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ


पुराणकोष से

(1) तीर्थंकर वृषभदेव और उनकी दूसरी रानी सुनंदा की पुत्री। ये बाहुबली की बहिन थी। वृषभदेव ने इसे अन्य भाई-बहिनों के साथ चित्र, अक्षर, संगीत, गणित आदि कलाओं में पारगत किया था। इसने अपने पिता तीर्थंकर ऋषभदेव से दीक्षा ले ली थी। यह आर्यिकाओं में अग्रणी रही। महापुराण 16. 7-8, 24.177, हरिवंशपुराण - 9.18, 22.24, 12.42, पांडवपुराण 2.155

(2) चक्रपुर नगर के राजा अपराजित की रानी, चक्रायुध की जननी। महापुराण 59.239, हरिवंशपुराण - 27.89-90

(3) भरतक्षेत्र के चित्रकारपुर नगर के राजा प्रीतिभद्र की रानी। प्रीतिकर की ये जननी थी। महापुराण 59.254-255, हरिवंशपुराण - 27.97

(4) मथुरा के राजा शूरसेन के सूरदेव पुत्र की स्त्री। यह विरक्त होकर दीक्षित हो गई थी। हरिवंशपुराण - 33.96-99, .127, .60.51

(5) विजयार्ध पर्वत की अलका नगरी के राजा महासेन को रानी। इस के उग्रसेन और वरसेन दो पुत्र तथा वसुंधरा पुत्री थी। महापुराण 76.262-263, 265

(6) भीलों के राजा हरिविक्रम की स्त्री। इसका वनराज पुत्र था। महापुराण 75.479-480

(7) जंबूद्वीप संबंधी भरत क्षेत्र में वत्स देश की कौशांबी नगरी के राजा पार्थिव की रानी और सिद्धार्थ की जननी। महापुराण 6.92-4

(8) गंधर्वपुर के राजा विद्याधर मंदरमाली की रानी। चिंतागति और मनोगति इसके दो पुत्र थे। महापुराण 8.92-93

(9) जंबूद्वीप के पूर्वविदेह क्षेत्र में पुष्कलावती देश की पुंडरीकिणी नगरी के राजा प्रियसेन की रानी। इसके दो पुत्र थे― प्रीतिंकर और प्रीतिदेव। महापुराण 9.108-109

(10) पुष्करद्वीप के पूर्वविदेह क्षेत्र में मंगलावती देश के रत्नसचय नगर के राजा महीधर की रानी। जयसेन इसका पुत्र था। महापुराण 10.114-116

(11) रावण की एक रानी। महापुराण 77.12

(12) भरत की भाभी। पद्मपुराण - 83.13


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=सुंदरी&oldid=130246"
Categories:
  • स
  • पुराण-कोष
  • प्रथमानुयोग
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 27 November 2023, at 15:30.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki