• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

सुग्रीव

From जैनकोष



सिद्धांतकोष से

( पद्मपुराण/ सर्ग/श्लोक.

..किष्किंध पुर के राजा सूर्यरज का पुत्र था तथा बाली का छोटा भाई था। (9/10) आयु के अंत में दीक्षित हो गया। (119/39)।


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ


पुराणकोष से

(1) विजयखेट नगर का एक क्षत्रिय गंधर्वाचार्य । इसकी सोमा और विजयसेना दो पुत्रियाँ थी । इसने अपनी इन पुत्रियों का विवाह वसुदेव से किया था । हरिवंशपुराण - 19.53-55,हरिवंशपुराण - 19.58

(2) जंबूद्वीप के भरतक्षेत्र की काकंदीपुरी के राजा एवं तीर्थंकर पुष्पदंत के पिता । महापुराण 55. 23-24, 27-28, पद्मपुराण - 20.45

(3) किष्किंध नगर के राजा वानरवंशी सूर्यरज और रानी इंदुमालिनी का कनिष्ठ पुत्र और बाली का भाई । श्रीप्रभा इसकी बहिन थी । महापुराण के अनुसार यह विजयार्ध पर्वत के किलकिल नगर के राजा विद्याधर वलींद्र और रानी प्रियंगुसुंदरी का पुत्र था । इसका विवाह ज्योतिपुर के राजा अग्निशिख और रानी ह्री देवा की पुत्री सुतारा से हुआ था । इसके अंग और अंगद दो पुत्र और तेरह पुत्रियाँ थी । साहसगति नामक एक दुष्ट विद्याधर इसका रूप धारण कर इसकी पत्नी सुतारा के पास आने-जाने लगा था । इसके इस संकट को राम ने दूर किया । उन्होंने उससे युद्ध किया और उसे मार डाला था । लंका में इंद्रजित न इसके साथ मायामय युद्ध किया था । जिसमें नागपाश से यह बांध लिया गया था । अंत में यह राम के द्वारा मुक्त हुआ । इसके पश्चात् इसने निर्ग्रंथ दीक्षा ले ली थी । महापुराण 68.271-273, पद्मपुराण -8. 487, 9.1, 10-12, 10.2-12, 47.53, 124-126, 137-142, 60.108, 61.10, 119.39 (4) राक्षसवंश के राजा संपरिकीर्ति का पुत्र और हरिग्रीव का पिता । यह पुत्र को राज्य सौंपकर उग्र तपश्चरण करते हुए देव हुआ था । पद्मपुराण - 5.387-390


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=सुग्रीव&oldid=130033"
Categories:
  • स
  • पुराण-कोष
  • प्रथमानुयोग
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 27 November 2023, at 15:30.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki