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सूर्यप्रभ

From जैनकोष



(1) रानी रामदत्ता का जीव, सहस्रार स्वर्ग का एक देव । हरिवंशपुराण - 27.75

(2) तीर्थंकर महावीर का जीव, सहस्रार स्वर्ग का एक देव । महापुराण 74.241, 251-252, 76.542

(3) चक्रवर्ती भरतेश का रत्न-निर्मित एक सत्र । महापुराण 37.156

(4) पुष्करार्ध द्वीप के विजयार्ध पर्वत की उत्तरश्रेणी का एक नगर एवं राजा । धारिणी इसकी रानी और चिंतागति, मनोगति तथा चपलगति ये तीन पुत्र थे । महापुराण 70.26-29

(5) सौधर्म स्वर्ग का देव । यह भरतक्षेत्र के हरिवर्ष देश में भोगपुर नगर के राजा सिंहकेतु और उसकी रानी विद्युन्माला को मारने का विचार करने वाले चित्रांगद देव का मित्र था । इसने चित्रांगद को समझा-बुझाकर इसे और इसकी रानी दोनों को बचाया था । महापुराण 70.74-83, पांडवपुराण 7.121-126


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