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जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

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स्वामित्व

From जैनकोष

  1. स्वामित्व का लक्षण
  2. अष्टकर्म बन्‍ध के स्‍वामियों की ओघ आदेश प्ररूपणा
  3. मोहनीय कर्म सत्त्व के स्‍वामित्‍व विषयक ओघ आदेश प्ररूपणा
  4. अष्ट कर्म उदीरणा के स्‍वामित्‍व विषयक ओघ आदेश प्ररूपणा
  5. अष्टकर्मोदय स्‍वामित्‍व सम्‍बन्‍धी ओघ आदेश प्ररूपणा
  6. अन्‍य विषयों के स्‍वामित्‍व सम्‍बन्‍धी ओघ आदेश प्ररूपणा
  7. अन्य संबंधित विषय
  8. 

1. स्वामित्व का लक्षण

सर्वार्थसिद्धि/1/7/22/3 स्वामित्वमाधिपत्यम् ।

सर्वार्थसिद्धि/1/25/132/4 स्वामी प्रयोक्ता।=स्वामी का अर्थ अधिष्ठाता है ( राजवार्तिक/1/7/-/38/2 ), (अवधि व मन:पर्यय ज्ञान के अर्थ में) स्वामी का अर्थ प्रयोक्ता है ( राजवार्तिक/1/25/-/86/9 )।


2. अष्टकर्म बन्‍ध के स्‍वामियों की ओघ आदेश प्ररूपणा

(महाबंध/पु.सं.), ( धवला/ पु.सं./पृ.सं.)

प्रकृति

विषय

उत्‍कृष्ट, अनुत्‍कृष्ट

भुजगार आदि पद

ज.उ.वृद्धि हानि

असंख्‍यात भागादि वृद्धि

सामान्‍य

1. प्रकृति बन्‍ध

मूल उत्तर

बन्‍धक सामान्‍य

महाबंध./1/

2. स्थिति बन्‍ध

मूल.

काल सामान्‍य

धवला 11/87-136

धवला 11/87

मूल.

ओघ आदेश

महाबंध../2/

महाबंध/2/

महाबंध/2/

महाबंध/2/

उत्तर

ओघ आदेश

महाबंध/2/

महाबंध/3/

महाबंध/3/

महाबंध/3/

मूल उत्तर

साता असाता के 2,3,4 स्‍थानीय अनुभाग बंधक जीवों की अपेक्षा

धवला 11/316

3. अनुभाग बन्‍ध

मूल

ओघ आदेश

महाबंध/4/

महाबंध /4/

महाबंध/4/

महाबंध/4/

उत्तर

ओघ आदेश

महाबंध/4/

महाबंध/5/

महाबंध/5/

महाबंध./5/

बन्‍धक के भाव

धवला 12/13

उत्तर

कालों में अल्‍पबहुत्‍व

धवला 12/211

उत्तर

स्‍थानों में अल्‍पबहुत्‍व

षट्खंडागम/12/256-267/214

4. प्रदेश बन्‍ध

मूल

ओघ आदेश

महाबंध/6/

महाबंध/6/

महाबंध/6/

उत्तर

ओघ आदेश

महाबंध/6/

5. विशेष

विषय

उत्‍कृष्‍ट

अनुत्‍कृष्‍ट

जघन्‍य

अजघन्‍य

ज्ञानावरणीय

मूल

प्रदेश संचय

धवला 10/31

धवला 10/210

धवला 10/268

धवला 10/299

दर्शनावरणीय

मूल

प्रदेश संचय

धवला 10/312

धवला 10/314

वेदनीय

मूल

प्रदेश संचय

धवला 10/316

धवला 10/327

मोहनीय

मूल

प्रदेश संचय

धवला 10/312

धवला 10/314

आयु

मूल

प्रदेश संचय

धवला 10/225

धवला 10/255

धवला 10/330

धवला 10/336

नाम, गोत्र

मूल

प्रदेश संचय

धवला 10/330

धवला 10/330

अन्‍तराय

मूल

प्रदेश संचय

धवला 10/312

धवला 10/314

प्रकृति

विषय

उत्‍कृष्ट

अनुत्‍कृष्ट

जघन्‍य

अजघन्‍य

1 ज्ञानावरणीय मूल

क्षेत्र या अवगाहना

धवला 11/14

धवला 11/23

धवला 11/33

धवला 11/33

2,4,8 दर्शना.मोहनीय अन्‍तराय मूल

क्षेत्र या अवगाहना

धवला 11/29

धवला 11/29

धवला 11/53

धवला 11/53

3 वेदनीय मूल

क्षेत्र या अवगाहना

धवला 11/29

धवला 11/33

धवला 11/53

धवला 11/53

5-7 आयु, नाम, गोत्र

क्षेत्र या अवगाहना

धवला 11/33

धवला 11/33

धवला 11/53

धवला 11/53


3. मोहनीय कर्म सत्त्व के स्‍वामित्‍व विषयक ओघ आदेश प्ररूपणा– ( कषायपाहुड़/ पु.सं. /)

सं.

मूल या उत्तर

विषय

उत्‍कृष्टानुत्‍कृष्ट

भुजगारादि पद

ज.उ.वृद्धि हानि

षट्‌स्‍थान वृद्धि-हानि

स्‍वामित्‍व सामान्‍य

1

प्रकृति सत्त्व

1

राग व द्वेष भाव

1/

सामान्‍य

कर्म सत्ता व असत्ता सामान्‍य

3/

मूल

कर्म सत्त्व असत्त्व

2/

उत्तर

कर्म सत्त्व व असत्त्व

2/

उत्तर

परस्‍पर सन्निकर्ष

2/

उत्तर

28,24,23 आदि स्‍थानों की समुत्‍कीर्तना

2/

2/

2/

2/

2/

2

स्थिति सत्त्व

1

मूल

3/

3/

3/

3/

2

उत्तर

3/

3/

3/

3/

3

अनुभाग सत्त्व

1

मूल

5/

5/

5/

5/

2

उत्तर

5/

5/

5/


4. अष्ट कर्म उदीरणा के स्‍वामित्‍व विषयक ओघ आदेश प्ररूपणा ( धवला 15/ पृष्ठ सं.)

क्र.

प्रकृति

मूल व उत्तर

जघन्‍य उत्‍कृष्ट

भुजगारादि पद

ज.उ.वृद्धि हानि

स्‍वामित्‍व सामान्‍य

भंगों या स्‍थानों का स्‍वामित्‍व

1

प्रकृति उदीरणा

1

अष्ट कर्म

मूल

46-48

51

53

44-46

48

2

ज्ञाना., दर्शना.

उत्तर

81-83

97-99

100

54-61

3

वेदनीय, मोहनीय

उत्तर

81-83

97-99

100

81-83

4

आयु, नाम

86-96

97-99

100

81-83

5

गोत्र, अन्‍तराय

उत्तर

97

97-99

100

86-96,97

2

स्थिति उदीरणा

1

अष्टकर्म

मूल

104-118

3

अनुभाग उदीरणा

1

अष्टकर्म

मूल

176-190

237-249

4

प्रदेश उदीरणा

1

अष्टकर्म

मूल

253-261

264-271


5. अष्टकर्मोदय स्‍वामित्‍व सम्‍बन्‍धी ओघ आदेश प्ररूपणा ( धवला 15/ पृष्ठ सं.)

सं.

प्रकृति

मूल व उत्तर

उत्‍कृष्टानुत्‍कृष्ट

भुजगारादि पद

ज.उ.वृद्धि हानि

षट्‌स्‍थान वृद्धि-हानि

स्‍वामित्‍व सामान्‍य

1

प्रकृति उदय

1

अष्टकर्म

मूल

285

उत्तर

285-288

2

स्थिति उदय

1

अष्टकर्म

मूल

290

294

295

295

उत्तर

295

295

295

3

अनुभाग उदय

1

अष्टकर्म

मूल

295

295

295

295

उत्तर

295-296

295-296

295-296

295-296

4

प्रदेश उदय

1

अष्टकर्म

मूल

296

296

296

296

उत्तर

297-309

325

332-334

×


6. अन्‍य विषयों के स्‍वामित्‍व सम्‍बन्‍धी ओघ आदेश प्ररूपणा ( धवला 15/ पृष्ठ सं.)

सं. प्रकृति

विषय

उत्‍कृष्टानुत्‍कृष्ट पद

भुजगारादि पद

ज.उ.वृद्धि हानि

स्‍वामित्‍व सामान्‍य

1. मूलोत्तर प्रकृति

उपशमना

280

276-278

संक्रमण

283-284

2. मूलोत्तर स्थिति

उपशमना

281

संक्रमण

283-284

3. मूलोत्तर अनुभाग

उपशमना

282

संक्रमण

283-284

4. मूलोत्तर प्रदेश

उपशमना

282

संक्रमण

283-284


7. अन्य संबंधित विषय

  1. पाँचों शरीर की जघन्योत्कृष्ट संघातन परिशातन कृति के स्वामित्व की ओघादेश प्ररूपणा-( षट्खंडागम/9/ सूत्र 71/329-346)।
  2. पाँच शरीरों में बंध को प्राप्त वर्गणाओं में ज.उ.विस्रसोपचयों के स्वामित्व की ओघ आदेश प्ररूपणा-( धवला 14/559-562 )।


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