एककल्याणक

From जैनकोष



एक व्रत । इसकी साधना के लिए पहले दिन नीरस आहार लिया जाता है । दूसरे दिन के पिछले भाग में आधा आहार लिया जाता है । तीसरे दिन एकासन किया जाता है― इसमें भोजन में प्रथम बार जो भोजन सामने आवे उसे ही ग्रहण किया जाता है । चौथे दिन उपवास और पांचवें दिन आचांभ भोजन (इमली के साथ भात आहार में लेना) किया जाना है । हरिवंशपुराण 34.110


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