• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in
Shivir Banner

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

 Actions
  • ग्रन्थ
  • Discussion
  • View source
  • View history

ग्रन्थ

ग्रन्थ:पंचास्तिकाय संग्रह-सूत्र - गाथा 74 - समय-व्याख्या

From जैनकोष



खंदं सयलसमत्थं तस्स दु अद्धं भणंति देसोत्ति । (74)

अद्धद्धं च पदेसो परमाणू चेव अविभागी ॥81॥

अर्थ: 

सकलसमस्त (पुद्गल पिण्ड) स्कन्ध है, उसके आधे को देश कहते हैं। आधे का आधा प्रदेश है और परमाणु ही अविभागी है।

समय-व्याख्या: 

पुद्गलद्रव्यविकल्पनिर्देशोऽयम् ।

अनन्तानन्तपरमाण्वारब्धोऽप्येकः स्कन्धो नाम पर्यायः । तदर्धं स्कन्धदेशो नामपर्यायः । तदर्धार्धं स्कन्धप्रदेशो नाम पर्यायः । एवं भेदवशात् द्वयणुकस्कन्धादनन्ताःस्कन्धप्रदेशपर्यायाः । निर्विभागैकप्रदेशः स्कन्धस्यान्त्यो भेदः परमाणुरेकः । पुनरपि द्वयोःपरमाण्वोः सङ्घातादेको द्वयणुकस्कन्धपर्यायः । एवं सङ्घातवशादनन्ताः स्कन्धपर्यायाः । एवंभेदसङ्घाताभ्यामप्यनन्ता भवन्तीति ॥७४॥

समय-व्याख्या हिंदी : 

यह, पुद्गल भेदों का वर्णन है ।

अननतानन्त परमाणुओं से निर्मित होने पर भी जो एक हो वह स्कन्ध नाम की पर्याय है; इसकी आधी स्कन्ध-देश नामक पर्याय है; आधी की आधी स्कन्ध-प्रदेश नाम की पर्याय है । इस प्रकार भेद के कारण (पृथक होने के कारण) द्विअणुक स्कन्ध-पर्यन्त अनन्त स्कन्ध-प्रदेश-रूप पर्यायें होती हैं । निर्विभाग / एक-प्रदेश-वाला, स्कन्ध का अंतिम अंश, वह एक परमाणु है । (इस प्रकार भेद से होने-वाले पुद्गल-विकल्पों का वर्णन हुआ ।)

पुनश्च, दो परमाणुओं के संघात से (मिलने से) एक द्विअणुक-स्कन्ध-रूप पर्याय होती है । इस प्रकार संघात के कारण (द्विअणुक-स्कन्ध की भाँति त्रिअणुक-स्कन्ध, चतुरणुक-स्कन्ध इत्यादि) अनन्त स्कन्ध-रूप पर्यायें होती है । (इस प्रकार भेद-संघात से होने-वाले पुद्गल-विकल्प का वर्णन हुआ) ॥७४॥

पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

इसी गाथा की तात्पर्य-वृत्ति टीका

समय-व्याख्या अनुक्रमणिका

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=ग्रन्थ:पंचास्तिकाय_संग्रह-सूत्र_-_गाथा_74_-_समय-व्याख्या&oldid=115761"
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 30 June 2023, at 13:26.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki