ग्रन्थ:सर्वार्थसिद्धि - अधिकार 3 - सूत्र 15
From जैनकोष
394. तत्राद्यस्य संस्थानविशेषप्रतिपत्त्यर्थमाह-
394. इनमें-से पहले तालाबके आकार-विशेषका ज्ञान करानेके लिए आगेका सूत्र कहते हैं-
प्रथमो योजनसहस्रायामस्तदर्द्धविष्कम्भो ह्रदः ।।15।।
पहला तालाब एक हजार योजन लम्बा और इससे आधा चौड़ा है ।।15।।
395. प्राक्प्रत्यग् योजनसहस्रयाम उदगवाक् पञ्चयोजनशतविस्तारो वज्रमयतलो विविधमणिकनकविचित्रिततटः पद्मनामाह्रदः।
395. पद्म नामक तालाब पूर्व और पश्चिम एक हजार योजन लम्बा तथा उत्तर और दक्षिण पाँच सौ योजन चौड़ा है। इसका तलभाग वज्र से बना हुआ है। तथा इसका तट नाना प्रकारके मणि और सोनेसे चित्रविचित्र है।