ग्रन्थ:सर्वार्थसिद्धि - अधिकार 3 - सूत्र 17
From जैनकोष
398. [1]तन्मध्ये किम्-
398. इसके बीच में क्या है ?
तन्मध्ये योजनं पुष्करम् ।।17।।
इसके बीच में एक योजन का कमल है ।।17।।
399. योजनप्रमाणं योजनम्, क्रोशायामपत्रत्वात्क्रोशद्वयविष्कम्भकर्णिकत्वाच्च योजनायामविष्कम्भम्। जलतलात्क्रोशद्वयोच्छ्रायनालं यावद्बहुलपत्रप्रचयं पुष्करमवगन्तव्यम्।
399. सूत्रमें जो ‘योजनम्’ पद दिया है उससे एक योजन प्रमाण लेना चाहिए। तात्पर्य यह है कि कमल का पत्ता एक कोस लम्बा है और उसकी कर्णिका का विस्तार दो कोस का है, इसलिए कमल एक योजन लम्बा और एक योजन विस्तार वाला है। इस कमल की नाल जलतल से दो कोस ऊपर उठी है और इसके पत्तों की उतनी ही मोटाई है। इस प्रकार यह कमल जानना चाहिए।
पूर्व सूत्र
अगला सूत्र
सर्वार्थसिद्धि अनुक्रमणिका
- ↑ -गाहः। तन्मध्ये योजनं आ., दि. 1, दि.।