ग्रन्थ:सर्वार्थसिद्धि - अधिकार 3 - सूत्र 18
From जैनकोष
400. इतरेषां ह्रदानां पुष्कराणां चायामादिनिर्ज्ञानार्थमाह-
400. अब दूसरे तालाब और कमलों की लम्बाई आदि का ज्ञान कराने के लिए आगे का सूत्र कहते हैं-
तद्द्विगुणद्विगुणा ह्रदाः पुष्कराणि च ।।18।।
आगे के तालाब और कमल दूने-दूने हैं ।।18।।
401. स च तच्च ते, तयोर्द्विगुणा[1] द्विगुणास्तद्द्विगुणद्विगुणा इति द्वित्वं व्याप्ति[2]ज्ञापनार्थम्। केन द्विगुणाः ? आयामादिना। पद्मह्रदस्य द्विगुणायामविष्कम्भावगाहो महापद्मो[3] ह्रदः। तस्य द्वि गुणायामविष्कम्भावगाहस्तिगिञ्छो[4] ह्रदः। पुष्कराणि च। किम् ? द्विगुणानि द्विगुणानीत्यभिसंबध्यते।
401. सूत्रमें जो ‘तत्’ पद आया है उससे तालाब और कमल दोनों का ग्रहण किया है। आगे के तालाब और कमल दूने-दूने हैं इस व्याप्ति का ज्ञान कराने के लिए सूत्र में ‘तद्द्विगुणद्विगुणाः’ कहा है। शंका-ये तालाब और कमल किसकी अपेक्षा दूने हैं ? समाधान- लम्बाई आदि की अपेक्षा। पद्म तालाब की जो लम्बाई, विस्तार और गहराई है महापद्म तालाब की लम्बाई, विस्तार और गहराई इससे दूनी है। इससे तिगिंछ तालाब की लम्बाई, विस्तार और गहराई दूनी है। शंका- कमल क्या है ? समाधान- ये भी लम्बाई आदि की अपेक्षा दूने-दूने हैं ऐसा यहाँ सम्बन्ध करना चाहिए।