ग्रन्थ:सर्वार्थसिद्धि - अधिकार 3 - सूत्र 19
From जैनकोष
402. तन्निवासिनीनां देवीनां संज्ञाजीवितपरिवारप्रतिपादनार्थमाह-
402. इनमें निवास करने वाली देवियों के नाम, आयु और परिवार का ज्ञान कराने के लिए आगे का सूत्र कहते हैं-
तन्निवासिन्यो देव्यः श्रीह्रीधृतिकीर्तिबुद्धिलक्ष्म्यः पल्योपमस्थितयः ससामानिकपरिषत्काः ।।19।।
इनमें श्री, ह्री, धृति, कीर्ति, बुद्धि और लक्ष्मी - ये देवियाँ सामानिक और परिषद् देवों के साथ निवास करती हैं। तथा इनकी आयु एक पल्योपम है ।।19।।
403. तेषु पुष्करेषु कर्णिकामध्यदेशनिवेशिनः शरद्विमलपूर्णचन्द्रद्युतिहराः क्रोशायामाः क्रोशार्द्धविष्कम्भा देशोनक्रोशोत्सेधाः प्रासादाः। तेषु निवसन्तीत्येवंशीलास्तन्निवासिन्यः, देव्यः श्रीह्रीधृतिकीर्तिबुद्धिलक्ष्मीसंज्ञिकास्तेषु पद्मादिषु यथाक्रमं वेदितव्याः। ‘पल्योपमस्थितयः’ इत्यनेनायुषः प्रमाणमुक्तम्। समाने स्थाने भवाः सामानिकाः। सामानिकाश्च परिषदश्च सामानिकपरिषदः। सह सामानिकपरिषद्भिर्वर्तन्त इति ससामानिकपरिषत्काः। तस्य पद्मस्य परिवारपद्मेषु प्रासादानामुपरि सामानिकाः परिषदश्च वसन्ति।
403. इन कमलों की कर्णिका के मध्य में शरत्कालीन निर्मल पूर्ण चन्द्रमा की कान्ति को हरने वाले एक कोस लम्बे, आधा कोस चौड़े और पौन कोस ऊँचे महल हैं। उनमें निवास करनेवाली श्री, ह्री, धृति, कीर्ति, बुद्धि और लक्ष्मी नामवाली देवियाँ क्रम से पद्म आदि छह कमलों में जानना चाहिए। उनकी स्थिति एक पल्योपम की है इस पद के द्वारा उनकी आयु का प्रमाण कहा है। समान स्थान में जो होते हैं वे सामानिक कहलाते हैं। सामानिक और परिषद् ये देव हैं। वे देवियाँ इनके साथ रहती है। तात्पर्य यह है कि मुख्य कमल के जो परिवार कमल हैं उनके महलों में सामानिक और परिषद् जाति के देव रहते हैं।