ग्रन्थ:सर्वार्थसिद्धि - अधिकार 3 - सूत्र 28
From जैनकोष
419. अथेतरासु भूमिषु कावस्थेत्यत आह-
419. इतर भूमियों में क्या अवस्था है अब इस बात के बतलाने के लिए आगे का सूत्र कहते हैं-
ताभ्यामपरा भूमयोऽवस्थिताः ।।28।।
भरत और ऐरावत के सिवा शेष भूमियाँ अवस्थित हैं ।।28।।
420. ताभ्यां भरतैरावताभ्यामपरा भूमयोऽवस्थिता भवन्ति। न हि तत्रोत्सर्पिण्यवसर्पिण्यौ स्तः।
420. सूत्रमें ‘ताभ्याम्’ पद से भरत और ऐरावत क्षेत्र का ग्रहण किया है। इन दोनों क्षेत्रों से शेष भूमियाँ अवस्थित हैं। उन क्षेत्रों में उत्सर्पिणी और अवसर्पिणी काल नहीं हैं।