ग्रन्थ:सर्वार्थसिद्धि - अधिकार 3 - सूत्र 30
From जैनकोष
423. अथोत्तरेषु कावस्थेत्यत आह-
423. उत्तर दिशावर्ती क्षेत्रों में क्या अवस्था है इसके बतलाने के लिए अब आगे का सूत्र कहते हैं-
तथोत्तराः ।।30।।
दक्षिण के समान उत्तर में है ।।30।।
424. यथा दक्षिणा व्याख्यातास्तथैवोत्तरा वेदितव्याः। हैरण्यवतका हैमवतकैस्तुल्याः। राम्यका हारिवर्षकैस्तुल्याः। दैवकुरवकैरौत्तरकुरवकाः समाख्याताः।
424. जिस प्रकार दक्षिण के क्षेत्रों का व्याख्यान किया उसी प्रकार उत्तर के क्षेत्रों का जानना चाहिए। हैरण्यवत क्षेत्रोंके मनुष्यों की सब बातें हैमवत के मनुष्योंके समान हैं, रम्यक क्षेत्र के मनुष्यों की सब बातें हरिवर्ष क्षेत्र के मनुष्यों के समान हैं और देवकुरु क्षेत्र के मनुष्यों की सब बातें उत्तरकुरु क्षेत्र के मनुष्यों के समान हैं।