ग्रन्थ:सर्वार्थसिद्धि - अधिकार 3 - सूत्र 31
From जैनकोष
425. अथ विदेहेष्ववस्थितेषु का स्थितिरित्यत्रोच्यते-
425. पाँच विदेहों में क्या स्थिति है इसके बतलाने के लिए आगे का सूत्र कहते हैं-
विदेहेषु संख्येयकालाः ।।31।।
विदेहों में संख्यात वर्ष की आयु वाले मनुष्य हैं ।।31।।
426. [1]सर्वेषु विदेहेषु संख्येयकाला मनुष्याः। तत्र कालः [2]सुषमदुष्षमान्तोपमः सदावस्थितः। मनुष्याश्च पञ्चधनुःशतोत्सेधाः। नित्याहाराः। उत्कर्षेणैकपूर्वकोटीस्थितिकाः। जघन्येनान्तर्मुहूर्तायुषः। तस्याश्च[3] संबन्धे गाथां पठन्ति-
‘‘पुव्वस्स दु परिमाणं सदरिं खलु कोडिसदसहस्साइं। छप्पण्णं च सहस्सा बोद्धव्वा वासकोडीणं[4] ।।’’
426. सब विदेहों में संख्यात वर्ष की आयु वाले मनुष्य होते हैं। वहाँ सुषमदुःषमा काल के अन्त के समान काल सदा अवस्थित है। मनुष्यों के शरीर की ऊँचाई पाँच सौ धनुष होती है, वे प्रतिदिन आहार करते हैं। उनकी उत्कृष्ट आयु एक पूर्वकोटि वर्षप्रमाण और जघन्य आयु अन्तर्मुहूर्त प्रमाण है। इसके सम्बन्ध में एक गाथा कही जाती है-‘‘एक पूर्वकोटि का प्रमाण सत्तर लाख करोड़ और छप्पन हजार करोड़ वर्ष जानना चाहिए।’’