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ग्रन्थ:सर्वार्थसिद्धि - अधिकार 3 - सूत्र 32

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427. उक्‍तो भरतस्‍य विष्‍कम्‍भः। पुनः प्रकारान्‍तरेण तत्‍प्रतिपत्‍त्‍यर्थमाह-
427. भरतक्षेत्र का विस्‍तार पहले कह आये हैं। अब प्रकारान्‍तर से उसका ज्ञान कराने के लिए आगे का सूत्र कहते हैं-
भर‍तस्‍य विष्‍कम्‍भो जम्‍बूद्वीपस्‍य नवतिशतभागः ।।32।।
भरत क्षेत्र का विस्‍तार जम्‍बूद्वीप का एकसौ नब्‍बेवाँ भाग है ।।32।।
428. जम्‍बूद्वीपविष्‍कम्‍भस्‍य योजनशतसहस्रस्‍य नवतिशतभागीकृतस्‍यैको भागो भ‍रतस्‍य विष्‍कम्‍भः। स पूर्वोक्‍त एव। उक्‍तं जम्‍बूद्वीपं परिवृत्‍य वेदिका स्थिता, ततः परो लवणोदः समुद्रो द्वियोजनशतसहस्रवलयविष्‍कम्‍भः। ततः परो धातकीखण्‍डो द्वीपश्‍चतुर्योजनशतसहस्रवलयविष्‍कम्‍भः।
428. एक लाख योजन प्रमाण जम्‍बूद्वीप के विस्‍तार के एक सौ नब्‍बे भाग करने पर जो एक भाग प्राप्‍त हो उतना भरतक्षेत्र का विस्‍तार है जो कि पूर्वोक्‍त पाँचसौ छब्‍बीस सही छह बटे उन्‍नीस योजन होता है।


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