चंद्रनखा

From जैनकोष



सिद्धांतकोष से

( पद्मपुराण/7/224 ) रत्नश्रवा की पुत्री और रावण की बहन थी। ( पद्मपुराण/7/43 ) खरदूषण की स्त्री थी। ( पद्मपुराण/78/95 ) रावण की मृत्यु पर दीक्षा धारण कर ली।


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पुराणकोष से

रत्नश्रवा और केकसी की पुत्री । यह दशानन की बहिन, खरदूषण की पत्नी, शंबूक और सुंद नामक पुत्रों तथा अनंगपुष्पा कन्या की जननी थी । इसने राम को अपना पति बनाना चाहा था, किंतु राम के द्वारा उसका निवेदन स्वीकार न किये जाने पर यह लक्ष्मण के पास गयी । लक्ष्मण से भी हताश होकर इसने अपना रूप क्षत-विक्षत कर लिया और अपने पति खरदूषण से लक्ष्मण के आरोपित दुर्व्यवहार की शिकायत की । इसने अपने पति को लक्ष्मण से युद्ध करने के लिए विवश कर दिया । युद्ध में खरदुषण मारा गया । पद्मपुराण 7.222-225, 19.101-102, 43.4044, 109-112, 44. 1-20 राम-रावण युद्ध में रावण का वध होते ही मंदोदरी के साथ इसने भी शशिकांता आर्यिका से दीक्षा ले ली । पद्मपुराण 78-94-95


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