• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

चंद्राभ

From जैनकोष



सिद्धांतकोष से

  1. विजयार्ध की दक्षिण श्रेणी का एक नगर–देखें विद्याधर ।
  2. लौकांतिक देवों की एक जाति–देखें लौकांतिक देव ।
  3. 11वें कुलकर–देखें सोलह कुलकर निर्देश IX.1 ।


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ


पुराणकोष से

(1) ग्यारहवें कुलकर । ये अभिचंद्र कुलकर के पुत्र थे । इन्होंने पल्य के दस हजार करोड़ वें भाग तक जीवित रहकर मरुदेव नामक पुत्र को जन्म दिया था तथा एक मास तक उसका लालन-पालन कर स्वर्ग प्राप्त किया था । पद्मपुराण - 3.87, हरिवंशपुराण - 7.162-164, पांडवपुराण 2.106 ये नयुतप्रमितायु छ: सौ धनुष अवगाहना-प्राप्त और उदयकालीन सूर्य के समान दैदीप्यमान थे । चंद्रमा के समान जीवों के आह्लादिक होने से ये सार्थक नामधारी थे । इनके समय में पुत्र के साथ रहने का भी समय मिलने लगा था । महापुराण 3. 134-138

(2) विजयार्ध की दक्षिणश्रेणी का एक नगर । महापुराण 19.50, 53, 75.390

(3) रत्नप्रभा नगर के खरभाग का चौदहवाँ पटल । हरिवंशपुराण - 4.54 देखें खरभाग

(4) विजयार्ध पर्वत के द्युतिलक नगर का राजा । यह विद्याधरों का स्वामी, सुभद्रा का पति और वायुवेगा का पिता था । महापुराण 62.36-37,74,134, वीरवर्द्धमान चरित्र 3.73-74

(5) राम के पक्ष का एक विद्याधर योद्धा । बहुरूपिणी विद्या की साधना मे रत रावण को विचलित करने के उद्देश्य से यह लंका गया था । पद्मपुराण - 58.3-7,पद्मपुराण - 58.70. 12-16

(6) वसुदेव के भाई अभिचंद्र का तीसरा पुत्र । हरिवंशपुराण - 48.52

(7) ब्रह्म स्वर्ग का एक विमान । हरिवंशपुराण - 27.117

(8) एक विद्याधर । तापस मृगशृंग ने इसे देखकर ही विद्याधर होने का निदान किया था । हरिवंशपुराण - 27.120-121

(9) रोहिणी के स्वयंवर में आया हुआ एक नृप । हरिवंशपुराण - 31.28

(10) राजपुर नगर-निवासी धनदत्त बौर नंदिनी का पुत्र । महापुराण 75.527-529


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=चंद्राभ&oldid=125080"
Categories:
  • च
  • पुराण-कोष
  • प्रथमानुयोग
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 27 November 2023, at 15:10.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki