छत्रच्छाय

From जैनकोष



महापुर नगर का राजा । इसकी रानी श्रीदत्ता थी । इसी नगर के सेठ मेरु और सेठानी धारिणी के पुत्र पद्मरूचि (धनदत्त का जीव) द्वारा मरणकाल में पंचनमस्कार― मंत्र सुनकर एक बैल अगले जन्म में राजा का पुत्र हुआ । वृषभध्वज उसका नाम था । पद्मपुराण 106. 38-48


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