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नंदन

From जैनकोष



सिद्धांतकोष से

  1. वर्द्धमान भगवान् का पूर्व का दूसरा भव। एक सज्जन के पुत्र थे। -देखें महावीर
  2. भगवान् के तीर्थ में एक अनुत्तरोपपादिक। -देखें अनुत्तरोपपादिक
  3. सौधर्म स्वर्ग का सातवाँ पटल। -देखें स्वर्ग - 53
  4. मानुषोत्तर पर्वत का एक कूट व उस पर निवासिनी एक सुपर्ण कुमारी देवी। -देखें लोक - 5.10
  5. सुमेरु पर्वत का द्वितीय वन जिसके चारों दिशाओं में चार चैत्यालय हैं। -देखें लोक - 3.6
  6. सौमनस व नंदन वन का एक कूट। -देखें लोक - 5.5
  7. विजयार्ध की उत्तर श्रेणी का एक नगर। -देखें विद्याधर


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पुराणकोष से

(1) विजयार्ध उत्तरश्रेणी का चालीसवाँ नगर । हरिवंशपुराण - 22.89

(2) मानुषोत्तर पर्वत की दक्षिण दिशा के रुचककूट का निवासी एक देव । हरिवंशपुराण - 5.603

(3) सौधर्म और ऐशान नामक युगल स्वर्गों का सातवां इंद्रक विमान । हरिवंशपुराण - 6.45, -देखें सौधर्म

(4) बलदेव का एक पुत्र । हरिवंशपुराण - 48.67

(5) तीर्थंकर वृषभदेव के सातवें गणधर । महापुराण 43.55, हरिवंशपुराण - 12.56

(6) मेरु की पूर्वोत्तर दिशा में विद्यमान एक वन । अपरनाम महोद्यान । यह भद्रशाल वन से पाँच सौ योजन ऊपर मेरु पर्वत के चारों ओर पाँच सौ योजन चौड़ाई में स्थित है । इस वन के समीप मेरु की बाह्य परिधि इकतीस हजार चार सौ उन्यासी योजन तथा आभ्यंतर परिधि अट्ठाईस हजार तीन सौ सोलह योजन तथा कुछ अधिक आठ कला प्रमाण है । इस वन के साढ़े बासठ हजार योजन ऊपर सौमनस वन है । महापुराण 5.144, 172, 183, 7.35, 13. 69, 47.263, 57.75, 71.362, पद्मपुराण -6. 135, 23.13, हरिवंशपुराण - 5.290-295, 307, 328, 8.190, 60.46, वीरवर्द्धमान चरित्र 8.111-112

(7) नंदनवन का एक उपवन । हरिवंशपुराण - 5.307

(8) नंदनवन का प्रथम कूट । हरिवंशपुराण - 5.329

(9) विजय नगर के राजा महेंद्रदत्त के गुरु । महेंद्रदत्त दसवें चक्रवर्ती हरिषेण के पूर्वभव का जीव था । पद्मपुराण - 20.185-186

(10) जंबूद्वीप के पूर्व विदेहक्षेत्र में विद्यमान एक नगर । महापुराण 60-58

(11) जंबूद्वीप के पूर्व विदेहक्षेत्र में वत्सकावती देश की प्रभाकरी नगरी का नृप । यह जयसेना का पति और विजयभद्र का पिता था । महापुराण 62.75-76

(12) एक मुनि । अपनी आयु का एक मास शेष रह जाने पर अमिततेज ने अपने पुत्रों को राज्य देकर इनसे प्रायोपगमन सन्यास लिया था । महापुराण 62.408-410 नंदनपुर के राजा अमितविक्रम को धनश्री और अनंतश्री नामक पुत्रियों को इन्होंने धर्मोपदेश दिया था । महापुराण 63.13

(13) एक पर्वत । महापुराण 63.33

(14) नंदपुर नगर का राजा । इसने मेघरथ मुनि को आहार दिया था । महापुराण 63.33 2-335

(15) आगामी नवें तीर्थंकर का जीव । महापुराण 76.472

(16) नंदन भवन का राजा यह भरत पर आक्रमण करने के लिए अतिवीर्य की सहायतार्थ उसके पास आया था । पद्मपुराण - 37.20

(17) एक देश । सीता के पुत्र लवण और अंकुश ने यह देश जीता था । पद्मपुराण - 101.77

(18) एक वानरवंशी राजा । इसके रथ में सौ घोड़े जुते हुए थे । इसने रावण के ज्वर नामक योद्धा को मारा था । यह भरत के साथ दीक्षित हुआ और अपने तप के अनुसार शुभगति को प्राप्त हुआ । पांडवपुराण 60.5-6, 10, 70.12-16, 88.1-4

(19) सौधर्मेंद्र देव द्वारा स्तुत वृषभदेव का एक नाम । महापुराण 25.167


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