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वर्णीजी-प्रवचन

वर्णीजी-प्रवचन:ज्ञानार्णव - श्लोक 60

From जैनकोष



ये दृष्टिपथमायाता: पदार्था: पुण्यमूर्तय:।

पूर्वाह्ने न च मध्याह्ने ते प्रयांतीह देहिनाम्।।60।।

वैभवों की क्षणिकता― इस संसार में जो भी बड़े उत्तमोत्तम पदार्थ दृष्टि में आते हैं वे पूर्वाह्न में हैं तो मध्याह्न में नहीं हैं। प्रभात के समय कोई पदार्थ दिखता था, दोपहर काल में वह पदार्थ नष्ट हो जाता है। किसी के बालक हुआ, पूर्वाह्नकाल में खुशी मनायी और मध्याह्नकाल में नहीं रहा तो उसके घर में रंज छा जाता है। पूर्वाह्न काल में श्री रामचंद्र जी का राज्याभिषेक होने को था, थोड़े ही समय बाद क्या से क्या घटना बनती है कि वे अयोध्या को भी छोड़कर जंगल में चले जाते हैं। कितने ही सुख कभी आयें, कुछ ही समय बाद वे खिर जाते हैं।


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