• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

 Actions
  • वर्णीजी-प्रवचन
  • Discussion
  • View source
  • View history

वर्णीजी-प्रवचन

वर्णीजी-प्रवचन:रत्नकरंड श्रावकाचार - श्लोक 92

From जैनकोष



देशावकाशिंक स्यात् कालापरिच्छेदनेन देशस्य ।

प्रत्यहमणुव्रतानां, प्रतिसंहारो विशालस्य ।। 92 ।।

देशावकाशिक नाम के शिक्षाव्रत का स्वरूप―शिक्षाव्रत के चार भेदों में यह पहला भेद देशावकाशिक नाम का है जिसका दूसरा नाम है देशव्रत । अणुव्रत के धारी पुरुष अणुव्रत के बढ़ाने के लिए उनका निर्दोष पालन बने इसके लिए शिक्षाव्रत ग्रहण करते हैं । जिन वृत्तियों से मुनिव्रत की शिक्षा मिले वे वृत्तियां उच्च ही तो हैं, जिनके कारण अणुव्रत का सही पद्धति से पालन और परिवर्द्धन होता है । देशव्रत कहते हैं दिग्व्रत में ली हुई मर्यादा के भीतर और क्षेत्र घटाकर काल की मर्यादा से परिमाण कर लेना, उसके बाहर न आना-जाना, इसे कहते हैं देशव्रत । पहले तो दिग्व्रत में यावज्जीव मर्यादा की थी । अब उसमें भी बहुत कम मर्यादा करना याने क्षेत्र घटा लेना यह तो और विशेषता की ही बात है । सो रोज की मर्यादा या दिन माह आदिक काल की मर्यादा का परिमाण कर लेना कि हमारा आज दसमी तक इस क्षेत्र का परिमाण है या आजकल इसी मोहल्ले का परिमाण है, या इन दो घंटों में हमारा मंदिर जी का ही परिमाण है । ऐसा परिमाण रखकर उसके बाहर न आना जाना, व्यवहार न करना सो देशव्रत कहलाता है ।


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

अनुक्रमणिका

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=वर्णीजी-प्रवचन:रत्नकरंड_श्रावकाचार_-_श्लोक_92&oldid=85263"
Categories:
  • रत्नकरंड श्रावकाचार
  • प्रवचन
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 2 July 2021, at 16:35.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki