हम आये हैं जिनभूप! तेरे दरसन को

From जैनकोष

हम आये हैं जिनभूप! तेरे दरसन को
निकसे घर आरतिकूप, तुम पद परसनको।।हम. ।।१ ।।
वैननिसों सुगुन निरूप, चाहैं दरसनकों।।हम.।।२ ।।
`द्यानत' ध्यावै मन रूप, आनँद बरसन को ।।हम.।।३ ।।