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From जैनकोष

  1. भेद व लक्षण
    1. क्षेत्र सामान्य का लक्षण।
    2. क्षेत्रानुगम का लक्षण।
    3. क्षेत्र जीव के अर्थ में।
    4. क्षेत्र के भेद (सामान्य विशेष)।
    5. लोक की अपेक्षा क्षेत्र के भेद।
    6. क्षेत्र के भेद स्वस्थानादि।
    7. निक्षेपों की अपेक्षा क्षेत्र के भेद।
    8. स्वपर क्षेत्र के लक्षण।
    9. सामान्य विशेष क्षेत्र के लक्षण।
    10. क्षेत्र लोक व नोक्षेत्र के लक्षण।
    11. स्वस्थनादि क्षेत्रपदों के लक्षण।
    • समुद्​घातों में क्षेत्र विस्तार संबंधी—देखें वह वह नाम ।
    1. निष्कुट क्षेत्र का लक्षण।
    • निक्षेपोंरूप क्षेत्र के लक्षण।–देखें निक्षेप ।
    1. नोआगम क्षेत्र के लक्षण।
  2. क्षेत्र सामान्य निर्देश
    1. क्षेत्र व अधिकरण में अंतर।
    2. क्षेत्र व स्पर्शन में अंतर।
    3. वीतरागियों व सरागियों के स्वक्षेत्र में अंतर।
  3. क्षेत्र प्ररूपणा विषयक कुछ नियम
    1. गुणस्थानों में संभव पदों की अपेक्षा।
    2. गतिमार्गणा में संभव पदों की अपेक्षा।
    • नरक, तिर्यंच, मनुष्य, भवनवासी, व्यंतर, ज्योतिष, वैमानिक, व लौकांतिक देवों का लोक में अवस्थान।–देखें वह वह नाम ।
    • जलचर जीवों का लोक में अवस्थान।–देखें तिर्यंच - 3।
    • भोग व कर्मभूमि में जीवों का अवस्थान—देखें भूमि - 8।
    • मुक्त जीवों का लोक में अवस्थान—देखें मोक्ष - 5।
    1. इंद्रियादि मार्गणाओं में संभव पदों की अपेक्षा—
      1. इंद्रियमार्गणा
      2. कायमार्गणा
      3. योगमार्गणा
      4. वेद मार्गणा
      5. ज्ञानमार्गणा
      6. संयम मार्गणा
      7. सम्यक्त्व मार्गणा
      8. आहारक मार्गणा
    • एकेंद्रिय जीवों का लोक में अवस्थान—देखें स्थावर ।
    • विकलेंद्रिय व पंचेंद्रिय जीवों का लोक में अवस्थान।–देखें तिर्यंच - 3।
    • तेज व अप्​कायिक जीवों का लोक में अवस्थान।–देखें काय - 2.5
    • त्रस, स्थावर, सूक्ष्म, बादर, जीवों का लोक में अवस्थान–देखें वह वह नाम ।
    1. मारणांतिक समुद्​घात के क्षेत्र संबंधी दृष्टिभेद।
  4. क्षेत्र प्ररूपणाएँ
    1. सारणी में प्रयुक्त संकेत परिचय।
    2. जीवों के क्षेत्र की ओघ प्ररूपणा।
    3. जीवों के क्षेत्र की आदेश प्ररूपणा।
      1. गति मार्गणा
      2. इंद्रिय मार्गणा
      3. काय मार्गणा
      4. योग मार्गणा
      5. वेद मार्गणा
      6. कषाय मार्गणा
      7. ज्ञान मार्गणा
      8. संयम मार्गणा
      9. दर्शन मार्गणा
      10. लेश्या मार्गणा
      11. भव्यत्व मार्गणा
      12. सम्यक्त्व मार्गणा
      13. संज्ञी मार्गणा
      14. आहारक मार्गणा
  5. अन्य प्ररूपणाएँ
    1. अष्टकर्म के चतु:बंध की अपेक्षा ओघ आदेश प्ररूपणा।
    2. अष्टकर्म सत्त्व के स्वामी जीवों की अपेक्षा ओघ आदेश प्ररूपणा।
    3. मोहनीय के सत्त्व के स्वामी जीवों की अपेक्षा ओघ आदेश प्ररूपणा।
    4. पाँचों शरीरों के योग्य स्कंधों की संघातन परिशातन कृति के स्वामी जीवों की अपेक्षा ओघ आदेश प्ररूपणा।
    5. पाँच शरीरों में 2, 3, 4 आदि भंगों के स्वामी जीवों की अपेक्षा ओघ आदेश प्ररूपणा।
    6. 23 प्रकार की वर्गणाओं की जघन्य, उत्कृष्ट क्षेत्र प्ररूपणा।
    7. प्रयोग समवदान, अध:, तप, ईयापथ व कृतिकर्म इन षट्​ कर्मों के स्वामी जीवों की अपेक्षा ओघ आदेश प्ररूपणा।
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  • This page was last edited on 16 April 2023, at 17:04.
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