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ग्रन्थ

ग्रन्थ:सर्वार्थसिद्धि - अधिकार 3 - सूत्र 10

From जैनकोष



384. तत्र जम्‍बूद्वीपे षड्भिः कलपर्वतैर्विभक्‍तानि सप्‍त क्षेत्राणि कानि तानीत्‍यत आह-
384. इस जम्‍बूद्वीप में छह कुलपर्वतों से विभाजित होकर जो सात क्षेत्र हैं वे कौन-से हैं ? इसी बात को बतलाने के लिए आगे का सूत्र कहते हैं-
भरतहैमवत हरिविदेहरम्‍यकहैरण्‍यवतैरावतवर्षाः क्षेत्राणि [1]।।10।।
भरतवर्ष, हैमवतवर्ष, हरिवर्ष, विदेहवर्ष, रम्‍यकवर्ष, हैरण्‍यवतवर्ष और ऐरावतवर्ष - ये सात क्षेत्र हैं ।।10।।
385. भरतादयः संज्ञा अनादि‍कालप्रवृत्ताः अनिमित्ताः। तत्र भरतवर्षः क्‍व संनिविष्‍टः ? दक्षिणदिग्‍भागे हिमवतोऽद्रेस्‍त्रयाणां[2] समुद्राणां मध्‍ये आरोपितचापकारो भरतवर्षः। विजयार्द्धेन गङ्गासिन्‍धुभ्‍यां च विभक्‍तः[3] स षट्खण्‍डः। क्षुद्रहिमवन्‍तमुत्तरेण दक्षिणेन महाहिमवन्‍तं पूर्वापरसमुद्रयोर्मध्‍ये हैमवतवर्षः। निषधस्‍य दक्षिणतो महाहिमवत उत्‍तरतः पूर्वापरसमुद्रयोरन्‍तराले हरिवर्षः। निषधस्‍योत्तरान्‍नीलतो दक्षिणतः पूर्वापरसमुद्रयोरन्‍तरे विदेहस्‍य संनिवेशो द्रष्‍टव्‍यः। नीलत[4] उत्तरात्[5](द्) रुक्मिणो दक्षिणात् पूर्वापरसमुद्रयोर्मध्‍ये रम्‍यकवर्षः। रुक्मिण उत्तराच्छिखरिणो दक्षिणात्‍पूर्वापरसमुद्रयोर्मध्‍ये संनिवेशी[6] हैरण्‍यवतवर्षः। शिखरिण उत्तरतस्‍त्रयाणां समुद्राणां मध्‍ये ऐरावतवर्षः। विजयार्द्धेन रक्‍तारक्‍तोदाभ्‍यां च विभक्‍तः[7] स षट्खण्‍डः।
385. क्षेत्रोंकी भर‍त आदि संज्ञाएँ अनादिकालसे चली आ रही हैं और अनिमित्तक हैं। इनमें से भरत क्षेत्र कहाँ स्थित है ? हिमवान् पर्वत के दक्षिण में और तीन समुद्रों के बीचमें चढे़ हुए धनुष के आकार वाला भरत क्षेत्र है जो विजयार्ध और गंगा-सिन्‍धु से विभाजित होकर छह खण्‍डों में बटा हुआ है। क्षुद्र हिमवान् के उत्तर में और महाहिमवान् के दक्षिण में त‍था पूर्व-पश्चिम समुद्र के बीच में हैमवत क्षेत्र है। निषध के दक्षिण में और महाहिमवान् के उत्तर में तथा पूर्व और पश्चिम समुद्र के बीच में हरिक्षेत्र है। निषधके उत्तर में और नील के दक्षिण में तथा पूर्व और पश्चिम समुद्र के बीच में हरिक्षेत्र है। नील के उत्तर में और रुक्‍मी के दक्षिण में तथा पूर्व पश्चिम समुद्र के बीच में रम्‍यक क्षेत्र है। रुक्‍मी के उत्तर में और शिखरी के दक्षिण में तथा पूर्व और पश्चिम समुद्र के बीच में हैरण्‍यवत क्षेत्र है। शिखरी के उत्तर में और तीन समुद्रों के बीच में ऐरावत क्षेत्र है जो विजयार्द्ध और रक्‍ता-रक्‍तोदा से विभाजित होकर छह खण्‍डों में बँटा हुआ है।


पूर्व सूत्र
अगला सूत्र
सर्वार्थसिद्धि अनुक्रमणिका

  1. ↑ क्षेत्राणि ।।10।। भिन्‍न-भिन्‍नानि भरता-आ.।
  2. ↑ याणां च समु-मु.।
  3. ↑ विभक्‍तः षट्-मु.,।
  4. ↑ नीलवत उत्‍त- आ., दि.1, दि. 2।
  5. ↑ उत्‍तरः रुक्मिणो दक्षिणः मु.।
  6. ↑ संनिवेशो हैर-मु. ।
  7. ↑ -विभक्‍तः षट्-मु.।
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