ग्रन्थ:सर्वार्थसिद्धि - अधिकार 3 - सूत्र 12
From जैनकोष
388. तेषां वर्णविशेषप्रतिपत्त्यर्थमाह-
388. अब इन पर्वतों के वर्णविशेष का ज्ञान कराने के लिए आगे का सूत्र कहते हैं-
हेमार्जुनतपनीयवैडूर्यरजतहेममयाः ।।12।।
ये छहों पर्वत क्रम से सोना, चाँदी,तपाया हुआ सोना, वैडूर्यमणि, चाँदी और सोना - इनके समान रंग वाले हैं ।।12।।
389. त एते हिमवदादयः पर्वता हेमादिमया वेदितव्या यथाक्रमम्। हेममयो हिमवान् चीनपट्टवर्णः। अर्जुनमयो महाहिमवान् शुक्लवर्णः। तपनीयमयो निषधस्तरुणादित्यवर्णः। वैडूर्यमयो नीलो मयूरग्रीवाभः। रजतमयो रूक्मी शुक्लः। हेममयः शिखरो चीनपट्टवर्णः।
389.वे पर्वत क्रम से हेम आदि वर्ण वाले जानने चाहिए। हिमवान् पर्वत का रंग हेममय अर्थात् चीनी रेशम के समान है। महाहिमवान् का रंग अर्जुनमय अर्थात् सफेद है। निषध पर्वत का रंग तपाये गये सोने के समान अर्थात् उगते हुए सूर्य के रंगके समान है। नील पर्वत का रंग वैडूर्यमय अर्थात् मोर के गले की आभावाला है। रुक्मी पर्वत का रंग रजतमय अर्थात् सफेद है और शिखरी पर्वत का रंग हेममय अर्थात् चीनी रेशम के समान है।