ग्रन्थ:सर्वार्थसिद्धि - अधिकार 3 - सूत्र 25
From जैनकोष
413. इतरेषां विष्कम्भविशेषप्रतिपत्त्यर्थमाह-
413. अब इतर क्षेत्रों के विस्तार विशेष का ज्ञान कराने के लिए आगे का सूत्र कहते हैं-
तद्द्विगुणद्विगुणविस्तारा वर्षधरवर्षा विदेहान्ताः ।।25।।
विदेह पर्यन्त पर्वत और क्षेत्रों का विस्तार भरत क्षेत्र के विस्तार से दूना-दूना है ।।25।।
414. [1]ततो भरताद् द्विगुणो द्विगुणो विस्तारो येषां त इमे तद्द्विगुणद्विगुणविस्ताराः। के ते वर्षधरवर्षाः। किं सर्वे ? न; इत्याह विदेहान्ता इति।
414. जिनका भरत से दूना-दूना विस्तार है वे भरत से दूने-दूने विस्तार वाले कहे गये हैं। यहाँ ‘तद्द्विगुणद्विगुणविस्ताराः’ में बहुव्रीहि समास है। शंका- वे दूने-दूने विस्तार वाले क्या हैं ? समाधान- पर्वत और क्षेत्र। शंका-क्या सबका दूना-दूना विस्तार है ? समाधान- नहीं, किन्तु विदेह क्षेत्र तक दूना-दूना विस्तार है।
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- ↑ ततो द्विगुणो ता., ना.।