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ग्रन्थ

ग्रन्थ:सर्वार्थसिद्धि - अधिकार 3 - सूत्र 26

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415. अथोत्तरेषां कथमित्‍यत आह-
415. क्षेत्र और पर्वतों का विस्‍तार क्रम से किस प्रकार है अब इस बात के बतलाने के लिए आगे का सूत्र कहते हैं-
उत्तरा दक्षिणतुल्‍याः ।।26।।
उत्तर के क्षेत्र और पर्वतों का विस्‍तार दक्षिण के क्षेत्र और पर्वतों के समान है ।।26।।
416. उत्तरा ऐरावतादयो नीलान्‍ता भरतादिभिर्दक्षिणैस्तुल्‍या द्रष्‍टव्‍याः। अतीतस्‍य सर्वस्‍यायं विशेषो वेदितव्‍यः। तेन ह्रदपुष्‍करादीनां तुल्‍यता योज्‍या।
416. ‘उत्तर’ इस पद से ऐरावत क्षेत्र से लेकर नील पर्यन्‍त क्षेत्र और पर्वत लिये गये हैं। इनका विस्‍तार दक्षिण दिशावर्ती भरतादि के समान जानना चाहिए। पहले जितना भी कथन कर आये हैं उन सबमें यह विशेषता जाननी चाहिए। इससे तालाब और कमल आदि की समानता लगा लेनी चाहिए।


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