रे जिय! जनम लाहो लेह

From जैनकोष

रे जिय! जनम लाहो लेह
चरन ते जिन भवन पहुँचैं, दान दैं कर जेह।।रे जिय. ।।
उर सोई जामैं दया है, अरु रुधिरको गेह ।
जीभ सो जिन नाम गावै, सांचसौं करै नेह ।।रे जिय. ।।१ ।।
आंख ते जिनराज देखैं, और आँखैं खेह ।
श्रवन ते जिनवचन सुनि शुभ, तप तपै सो देह ।।रे जिय. ।।२ ।।
सफल तन इह भांति ह्वै है, और भांति न केह ।
ह्वै सुखी मन राम ध्यावो, कहैं सदगुरु येह ।।रे जिय. ।।३ ।।