सोग न कीजे बावरे! मरें पीतम लोग

From जैनकोष

सोग न कीजे बावरे! मरें पीतम लोग
जगत जीव जलबुदबुदा, नदी नाव सँजोग।।सोग. ।।
आदि अन्तको संग नहिं, यह मिलन वियोग ।
कई बार सबसों भयो, सम्बन्ध मनोग ।।सोग. ।।१ ।।
कोट वरष लौं रोइये, न मिलै वह जोग ।
देखैं जानैं सब सुनैं, यह तन जमभोग ।।सोग. ।।२ ।।
हरिहर ब्रह्मासे खये, तू किनमें टोग ।
`द्यानत' भज भगवन्त जो, विनसै यह रोग ।।सोग. ।।३ ।।