हमारो कारज ऐसे होय 2

From जैनकोष

हमारो कारज ऐसे होय
आतम आतम पर पर जानैं, तीनौं संशय खोय ।।हमारो. ।।
अंत समाधिमरन करि तन तजि, होय शक्र सुरलोय ।
विविध भोग उपभोग भोगवै, धरमतनों फल सोय ।।हमारो. ।।१ ।।
पूरी आयु विदेह भूप ह्वै, राज सम्पदा भोय ।
कारण पंच लहै गहै दुद्धर, पंच महाव्रत जोय ।।हमारो. ।।२ ।।
तीन जोग थिर सहै परीसह, आठ करम मल धोय ।
`द्यानत' सुख अनन्त शिव विलसै, जनमैं मरै न कोय ।।हमारो. ।।३ ।।