हमारो कारज कैसें होय 1

From जैनकोष

हमारो कारज कैसें होय
कारण पंच मुकति मारगके, जिनमें के हैं दोय ।।हमारो. ।।
हीन संहनन लघु आयूषा, अल्प मनीषा जोय ।
कच्चे भाव न सच्चे साथी, सब जग देख्यो टोय ।।हमारो. ।।१ ।।
इन्द्री पंच सुविषयनि दौरैं, मानैं कह्या न कोय ।
साधारन चिरकाल वस्यो मैं, धरम बिना फिर सोय ।।हमारो. ।।२ ।।
चिन्ता बड़ी न कछु बनि आवै, अब सब चिन्ता खोय ।
`द्यानत' एक शुद्ध निजपद लखि, आपमें आप समोय ।।हमारो. ।।३ ।।