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Category:आध्यात्मिक भक्ति

From जैनकोष

Revision as of 08:45, 29 February 2008 by Vikasnd (talk | contribs) (New page: '''विभिन्न कवियों द्वारा रचित आध्यात्मिक भक्ति''')
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विभिन्न कवियों द्वारा रचित आध्यात्मिक भक्ति

Pages in category "आध्यात्मिक भक्ति"

The following 200 pages are in this category, out of 245 total.

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अ

  • अज्ञानी पाप धतूरा न बोय
  • अति संक्लेश विशुद्ध शुद्ध पुनि
  • अन्तर उज्जवल करना रे भाई!
  • अपनी सुधि भूल आप, आप दुख उपायौ
  • अब अघ करत लजाय रे भाई
  • अब घर आये चेतनराय
  • अब पूरी कर नींदड़ी, सुन जिया रे! चिरकाल
  • अब मेरे समकित सावन आयो
  • अब मोहि जानि परी
  • अब समझ कही
  • अरहंत सुमर मन बावरे
  • अरे जिया, जग धोखे की टाटी
  • अरे हाँ रे तैं तो सुधरी बहुत बिगारी
  • अरे हो अज्ञानी तूने कठिन मनुषभव पायो
  • अरे हो जियरा धर्म में चित्त लगाय रे
  • अरे! हाँ चेतो रे भाई
  • अहो दोऊ रंग भरे खेलत होरी
  • अहो यह उपदेशमाहीं

आ

  • आकुलरहित होय इमि निशदिन
  • आगै कहा करसी भैया
  • आज सी सुहानी सु घड़ी इतनी
  • आतम अनुभव आवै जब निज
  • आतम अनुभव कीजै हो
  • आतम अनुभव सार हो, अब जिय सार हो, प्राणी
  • आतम काज सँवारिये, तजि विषय किलोलैं
  • आतम जान रे जान रे जान
  • आतम जाना, मैं जाना ज्ञानसरूप
  • आतम जानो रे भाई!
  • आतम महबूब यार, आतम महबूब
  • आतम रूप अनूपम अद्भुत
  • आतमज्ञान लखैं सुख होइ
  • आतमरूप अनूपम है, घटमाहिं विराजै हो
  • आतमरूप सुहावना, कोई जानै रे भाई ।
  • आयो रे बुढ़ापो मानी, सुधि बुधि बिसरानी
  • आरसी देखत मन आर-सी लागी
  • आवै न भोगनमें तोहि गिलान

इ

  • इस जीवको, यों समझाऊं री!

उ

  • उत्तम नरभव पायकै

ए

  • ए मेरे मीत! निचीत कहा सोवै

ऐ

  • ऐसा मोही क्यों न अधोगति जावै
  • ऐसी समझके सिर धूल
  • ऐसे विमल भाव जब पावै

औ

  • और ठौर क्यों हेरत प्यारा, तेरे हि घट में जानन हारा

क

  • कर कर आतमहित रे प्रानी
  • कर मन! निज-आतम-चिंतौन
  • कर रे! कर रे! कर रे!, तू आतम हित कर रे
  • करौ रे भाई, तत्त्वारथ सरधान
  • कर्मनिको पेलै, ज्ञान दशामें खेलै
  • कहा मानले ओ मेरे भैया
  • कहे सीताजी सुनो रामचन्द्र
  • काया गागरि, जोझरी, तुम देखो चतुर विचार हो
  • काल अचानक ही ले जायगा
  • काहे पाप करे काहे छल
  • काहेको सोचत अति भारी, रे मन!
  • कींपर करो जी गुमान
  • कुमति कुनारि नहीं है भली रे

ख

  • खेलौंगी होरी, आये चेतनराय

ग

  • गरव नहिं कीजै रे, ऐ नर
  • गलतानमता कब आवैगा
  • गहु सन्तोष सदा मन रे! जा सम और नहीं धन रे
  • गाफिल हुवा कहाँ तू डोले, दिन जाते तेरे भरती में

च

  • चरखा चलता नाहीं (रे) चरखा हुआ पुराना (वे)
  • चाहत है सुख पै न गाहत है धर्म जीव
  • चित्त! चेतनकी यह विरियां रे
  • चेतन अब धरि सहजसमाधि
  • चेतन खेलै होरी
  • चेतन निज भ्रमतैं भ्रमत रहै
  • चेतन प्राणी चेतिये हो,
  • चेतन! तुम चेतो भाई, तीन जगत के नाथ
  • चेतन! मान ले बात हमारी
  • चेतनजी! तुम जोरत हो धन, सो धन चलत नहीं तुम लार

छ

  • छांडत क्यौं नहिं रे
  • छांडि दे या बुधि भोरी

ज

  • जग में जीवन थोरा, रे अज्ञानी जागि
  • जग में श्रद्धानी जीव जीवन मुकत हैंगे
  • जगत जन जूवा हारि चले
  • जगत में सम्यक उत्तम भाई
  • जबतैं आनंदजननि दृष्टि परी माई
  • जम आन अचानक दावैगा
  • जहाँ रागद्वेष से रहित निराकुल
  • जानत क्यों नहिं रे, हे नर आतमज्ञानी
  • जानत क्यौं नहिं रे
  • जिन नाम सुमर मन! बावरे! कहा इत उत भटकै
  • जिन स्वपरहिताहित चीन्हा
  • जियको लोभ महा दुखदाई, जाकी शोभा (?)
  • जिया तुम चालो अपने देश
  • जीव तू अनादिहीतैं भूल्यौ शिवगैलवा
  • जीव! तू भ्रमत सदीव अकेला
  • जीव! तैं मूढ़पना कित पायो
  • जीवन के परिनामनिकी यह
  • जे दिन तुम विवेक बिन खोये
  • जे सहज होरी के खिलारी
  • जो आज दिन है वो, कल ना रहेगा, कल ना रहेगा
  • जो तैं आतमहित नहिं कीना
  • ज्ञाता सोई सच्चा वे, जिन आतम अच्चा
  • ज्ञान ज्ञेयमाहिं नाहिं, ज्ञेय हू न ज्ञानमाहिं
  • ज्ञान सरोवर सोई हो भविजन
  • ज्ञानी ऐसो ज्ञान विचारै
  • ज्ञानी ऐसो ज्ञान विचारै 2
  • ज्ञानी जीव निवार भरमतम

झ

  • झूठा सपना यह संसार

त

  • तन देख्या अथिर घिनावना
  • तुम चेतन हो
  • तुम ज्ञानविभव फूली बसन्त, यह मन मधुकर
  • तुमको कैसे सुख ह्वै मीत!
  • तू काहेको करत रति तनमें
  • तू तो समझ समझ रे!
  • तू स्वरूप जाने बिना दुखी
  • तेरे ज्ञानावरन दा परदा
  • तेरो करि लै काज वक्त फिरना
  • तेरो संजम बिन रे, नरभव निरफल जाय
  • तोकौं सुख नहिं होगा लोभीड़ा!
  • तोड़ विषियों से मन जोड़ प्रभु से लगन
  • तोहि समझायो सौ सौ बार
  • त्यागो त्यागो मिथ्यातम, दूजो नहीं जाकी सम

द

  • दियैं दान महा सुख पावै
  • दुरगति गमन निवारिये, घर आव सयाने नाह हो
  • देखे सुखी सम्यकवान
  • देखो भाई! आतमदेव बिराजै
  • देखो भाई! आतमराम विराजै

ध

  • धन धन साधर्मीजन मिलनकी घरी
  • धनि ते प्रानि, जिनके तत्त्वारथ श्रद्धान
  • धर्म बिन कोई नहीं अपना
  • धिक! धिक! जीवन समकित बिना
  • धोली हो गई रे काली कामली माथा की थारी
  • ध्यान धर ले प्रभू को ध्यान धर ले

न

  • न मानत यह जिय निपट अनारी
  • नगर में होरी हो रही हो
  • नरभव पाय फेरि दुख भरना
  • नहिं ऐसो जनम बारंबार
  • निज कारज काहे न सारै रे
  • निज जतन करो गुन-रतननिको, पंचेन्द्रीविषय
  • निजपुर में आज मची होरी
  • निजहितकारज करना भाई!
  • निपट अयाना, तैं आपा नहीं जाना

प

  • परनति सब जीवनकी
  • परमाथ पंथ सदा पकरौ
  • पल पल बीते उमरिया रूप जवानी जाती
  • पायो जी सुख आतम लखकै
  • पिया बिन कैसे खेलौं होरी
  • प्राणी लाल! छांडो मन चपलाई
  • प्राणी लाल! धरम अगाऊ धारौ
  • प्राणी! आतमरूप अनूप है, परतैं भिन्न त्रिकाल
  • प्राणी! सोऽहं सोऽहं ध्याय हो
  • प्रानी समकित ही शिवपंथा
  • प्रेम अब त्यागहु पुद्गल का

ब

  • बन्यौ म्हांरै या घरीमैं रंग
  • बाबा मैं न काहूका
  • बीतत ये दिन नीके, हमको

भ

  • भगवन्त भजन क्यों भूला रे
  • भजन बिन यौं ही जनम गमायो
  • भजो आतमदेव, रे जिय! भजो आतमदेव, लहो
  • भली भई यह होरी आई, आये चेतनराय
  • भलो चेत्यो वीर नर तू, भलो चेत्यो वीर
  • भववनमें, नहीं भूलिये भाई!
  • भवि कीजे हो आतमसँभार, राग दोष परिनाम डार
  • भाई काया तेरी दुखकी ढेरी
  • भाई कौन कहै घर मेरा
  • भाई! अब मैं ऐसा जाना
  • भाई! कहा देख गरवाना रे
  • भाई! ज्ञान बिना दुख पाया रे
  • भाई! ज्ञानका राह दुहेला रे 1
  • भाई! ज्ञानका राह सुहेला रे 2
  • भाई! ज्ञानी सोई कहिये
  • भाई! ब्रह्मज्ञान नहिं जाना रे
  • भाया थारी बावली जवानी चाली रे
  • भावों में सरलता
  • भैया! सो आतम जानो रे!
  • भोगारां लोभीड़ा, नरभव खोयौ रे अज्ञान
  • भ्रम्योजी भ्रम्यो, संसार महावन, सुख सो रमन्त

म

  • मंगल आरती आतमराम । तनमंदिर मन उत्तम ठान
  • मगन रहु रे! शुद्धातममें मगन रहु रे
  • मत कीज्यौ जी यारी
  • मत राचो धीधारी
  • मति भोगन राचौ जी
  • मन महल में दो दो भाव जगे
  • मन मूरख पंथी, उस मारग मति जाय रे
  • मन हंस! हमारी लै शिक्षा हितकारी!
  • मन! मेरे राग भाव निवार
  • महिमा जिनमतकी
  • मान न कीजिये हो परवीन
  • मानत क्यों नहिं रे
  • मानों मानों जी चेतन यह
  • मिथ्या यह संसार है, झूठा यह संसार है रे
  • मेरा साँई तौ मोमैं नाहीं न्यारा
  • मेरी मेरी करत जनम सब बीता
  • मेरे मन कब ह्वै है बैराग
  • मेरे मन सूवा, जिनपद पींजरे वसि, यार लाव न बार रे
  • मैं न जान्यो री! जीव ऐसी करैगो
  • मैं निज आतम कब ध्याऊंगा
  • मैं हूँ आतमराम
  • मैंने देखा आतमराम
  • मोहि कब ऐसा दिन आय है
  • मोही जीव भरम तमतैं नहिं
  • म्हांकै घट जिनधुनि अब प्रगटी

य

  • यह मोह उदय दुख पावै
  • यही इक धर्ममूल है मीता!
  • यारी कीजै साधो नाल

र

  • री! मेरे घट ज्ञान घनागम छायो
  • रे जिय! क्रोध काहे करै
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