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जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

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कविवर श्री द्यानतरायजी कृत भजन

From जैनकोष

  • आतम अनुभव कीजै हो
  • आतम अनुभव सार हो, अब जिय सार हो, प्राणी
  • आतम काज सँवारिये, तजि विषय किलोलैं
  • आतम जान रे जान रे जान
  • आतम जाना, मैं जाना ज्ञानसरूप
  • आतम जानो रे भाई!
  • आतम महबूब यार, आतम महबूब
  • आतमरूप अनूपम है, घटमाहिं विराजै हो
  • आपा प्रभु जाना मैं जाना
  • आतमरूप सुहावना, कोई जानै रे भाई ।
  • आतमज्ञान लखैं सुख होइ
  • इस जीवको, यों समझाऊं री!
  • ए मेरे मीत! निचीत कहा सोवै
  • कर कर आतमहित रे प्रानी
  • कर रे! कर रे! कर रे!, तू आतम हित कर रे
  • कर मन! निज-आतम-चिंतौन
  • कारज एक ब्रह्महीसेती
  • घटमें परमातम ध्याइये हो, परम धरम धनहेत
  • चेतनजी! तुम जोरत हो धन, सो धन चलत नहीं तुम लार
  • चेतन! तुम चेतो भाई, तीन जगत के नाथ
  • चेतन प्राणी चेतिये हो,
  • चेतन! मान ले बात हमारी
  • जगत में सम्यक उत्तम भाई
  • जानत क्यों नहिं रे, हे नर आतमज्ञानी
  • जानो धन्य सो धन्य सो धीर वीरा
  • जो तैं आतमहित नहिं कीना
  • तुमको कैसे सुख ह्वै मीत!
  • तुम चेतन हो
  • तुम ज्ञानविभव फूली बसन्त, यह मन मधुकर
  • देखे सुखी सम्यकवान
  • देखो भाई! आतमराम विराजै
  • निरविकलप जोति प्रकाश रही
  • पायो जी सुख आतम लखकै
  • प्राणी! आतमरूप अनूप है, परतैं भिन्न त्रिकाल
  • प्राणी! सोऽहं सोऽहं ध्याय हो
  • बीतत ये दिन नीके, हमको
  • भजो आतमदेव, रे जिय! भजो आतमदेव, लहो
  • भवि कीजे हो आतमसँभार, राग दोष परिनाम डार
  • भ्रम्योजी भ्रम्यो, संसार महावन, सुख सो रमन्त
  • भाई! अब मैं ऐसा जाना
  • भाई कौन कहै घर मेरा
  • भाई! ब्रह्मज्ञान नहिं जाना रे
  • भाई! ज्ञान बिना दुख पाया रे
  • भाई! ज्ञानी सोई कहिये
  • भैया! सो आतम जानो रे!
  • मगन रहु रे! शुद्धातममें मगन रहु रे
  • मन! मेरे राग भाव निवार
  • मैं निज आतम कब ध्याऊंगा
  • रे भाई! मोह महा दुखदाता
  • लाग रह्यो मन चेतनसों जी
  • लागा आतमसों नेहरा
  • लागा आतमरामसों नेहरा
  • वे परमादी! तैं आतमराम न जान्यो
  • सब जगको प्यारा, चेतनरूप निहारा
  • सुन चेतन इक बात
  • सुनो! जैनी लोगो, ज्ञानको पंथ कठिन है
  • सो ज्ञाता मेरे मन माना, जिन निज-निज पर पर जाना
  • श्रीजिनधर्म सदा जयवन्त
  • शुद्ध स्वरूपको वंदना हमारी
  • हम लागे आतमरामसों
  • हम तो कबहुँ न निज घर आये
  • हो भैया मोरे! कहु कैसे सुख होय
  • वे कोई निपट अनारी, देख्या आतमराम
  • ज्ञाता सोई सच्चा वे, जिन आतम अच्चा
  • ज्ञान सरोवर सोई हो भविजन
  • ज्ञान ज्ञेयमाहिं नाहिं, ज्ञेय हू न ज्ञानमाहिं
  • ज्ञानी ऐसो ज्ञान विचारै
  • ज्ञानी ऐसो ज्ञान विचारै 2
  • अरहंत सुमर मन बावरे
  • ए मान ये मन कीजिये भज प्रभु तज सब बात हो
  • चौबीसौं को वंदना हमारी
  • जिन के भजन में मगन रहु रे!
  • जिन जपि जिन जपि, जिन जपि जीयरा
  • जिन नाम सुमर मन! बावरे! कहा इत उत भटकै
  • जिनरायके पाय सदा शरनं
  • जिनवरमूरत तेरी, शोभा कहिय न जाय
  • तू ही मेरा साहिब सच्चा सांई
  • तेरी भगति बिना धिक है जीवना
  • मानुष जनम सफल भयो आज
  • मैं नूं भावैजी प्रभु चेतना, मैं नूं भावै जी
  • प्रभु! तुम नैनन-गोचर नाहीं
  • प्रभु तुम सुमरन ही में तारे
  • प्रभु तेरी महिमा किहि मुख गावैं
  • रे मन! भज भज दीनदयाल
  • वीतराग नाम सुमर, वीतराग नाम
  • हम आये हैं जिनभूप! तेरे दरसन को
  • अब समझ कही
  • आरसी देखत मन आर-सी लागी
  • काहेको सोचत अति भारी, रे मन!
  • कौन काम अब मैंने कीनों, लीनों सुर अवतार हो
  • गलतानमता कब आवैगा
  • चाहत है सुख पै न गाहत है धर्म जीव
  • जीव! तैं मूढ़पना कित पायो
  • झूठा सपना यह संसार
  • त्यागो त्यागो मिथ्यातम, दूजो नहीं जाकी सम
  • तू तो समझ समझ रे!
  • तेरो संजम बिन रे, नरभव निरफल जाय
  • दियैं दान महा सुख पावै
  • दुरगति गमन निवारिये, घर आव सयाने नाह हो
  • धिक! धिक! जीवन समकित बिना
  • नहिं ऐसो जनम बारंबार
  • निज जतन करो गुन-रतननिको, पंचेन्द्रीविषय
  • परमाथ पंथ सदा पकरौ
  • प्राणी लाल! छांडो मन चपलाई
  • प्राणी लाल! धरम अगाऊ धारौ
  • भाई! कहा देख गरवाना रे
  • भाई काया तेरी दुखकी ढेरी
  • भाई! ज्ञानका राह दुहेला रे 1
  • भाई! ज्ञानका राह सुहेला रे 2
  • मानों मानों जी चेतन यह
  • मिथ्या यह संसार है, झूठा यह संसार है रे
  • मेरी मेरी करत जनम सब बीता
  • मेरे मन कब ह्वै है बैराग
  • मोहि कब ऐसा दिन आय है
  • ये दिन आछे लहे जी लहे जी
  • रे जिय! जनम लाहो लेह
  • विपतिमें धर धीर, रे नर! विपतिमें धर धीर
  • समझत क्यों नहिं वानी, अज्ञानी जन
  • संसारमें साता नाहीं वे
  • सोग न कीजे बावरे! मरें पीतम लोग
  • हम न किसीके कोई न हमारा, झूठा है जगका ब्योहारा
  • हमारो कारज कैसें होय 1
  • हमारो कारज ऐसे होय 2
  • हमारे ये दिन यों ही गये जी
  • भाई धनि मुनि ध्यान-लगायके खरे हैं
  • यारी कीजै साधो नाल
  • सोहां दीव (शोभा देवें) साधु तेरी बातड़ियां
  • गौतम स्वामीजी मोहि वानी तनक सुनाई
  • जिनवानी प्रानी! जान लै रे
  • वे प्राणी! सुज्ञानी, जिन जानी जिनवानी
  • मैं न जान्यो री! जीव ऐसी करैगो
  • रे जिय! क्रोध काहे करै
  • सबसों छिमा छिमा कर जीव!
  • जियको लोभ महा दुखदाई, जाकी शोभा (?)
  • गहु सन्तोष सदा मन रे! जा सम और नहीं धन रे
  • साधो! छांडो विषय विकारी । जातैं तोहि महा दुखकारी
  • वे साधौं जन गाई, कर करुना सुखदाई
  • कर्मनिको पेलै, ज्ञान दशामें खेलै
  • खेलौंगी होरी, आये चेतनराय
  • चेतन खेलै होरी
  • नगर में होरी हो रही हो
  • पिया बिन कैसे खेलौं होरी
  • भली भई यह होरी आई, आये चेतनराय
  • परमगुरु बरसत ज्ञान झरी
  • री! मेरे घट ज्ञान घनागम छायो
  • कहे सीताजी सुनो रामचन्द्र
  • सुरनरसुखदाई, गिरनारि चलौ भाई
  • आरति श्रीजिनराज तिहारी, करमदलन संतन हितकारी
  • करौं आरती वर्द्धमानकी । पावापुर निरवान थान की
  • मंगल आरती आतमराम । तनमंदिर मन उत्तम ठान
  • आरति कीजै श्रीमुनिराजकी, अधमउधारन आतमकाजकी
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